वोटर आईडी को आधार कार्ड से करना पड़ेगा लिंक

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गड़बड़ियों को रोकने के लिए EC कर रहा बड़ी तैयारी
मतदाता सूची को मौजूदा समय में आधार से अनिवार्य रूप से जोड़ने पर रोक सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही लगी हुई है। लेकिन अब चुनाव आयोग अदालत में नए सिरे से मजबूती के साथ अपना पक्ष रख सकता है। पिछले कुछ सालों में स्वैच्छिक रूप से करीब 65 करोड़ मतदाताओं ने इसे आधार से लिंक करा दिया है। मतदाता सूची में गड़बड़ियों के लगातार आरोप लग रहे हैं।
मतदाता सूची में गड़बड़ियों के लगातार आरोपों से घिरे चुनाव आयोग के पास अब उसे आधार से जोड़ने के सिवाय और कोई विकल्प नजर नहीं आ रहा है। यही वजह है कि आयोग नए सिरे से इसे अनिवार्य रूप से आधार से जोड़ने का मन बनाया है। 

इसे लेकर जल्द ही वह सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना पक्ष रख सकता है। वैसे भी मतदाता सूची में गड़बड़ियों के मुद्दे पर राजनीतिक दल पहले से ही सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हुए है। माना जा रहा है कि इस मौके पर चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची को आधार से जोड़ने को लेकर नए सिरे से मजबूती के साथ अपना पक्ष रख सकता है। 

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक

मतदाता सूची को मौजूदा समय में आधार से अनिवार्य रूप से जोड़ने पर रोक सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही लगी हुई है। हालांकि कोर्ट ने चुनाव आयोग को इसे स्वैच्छिक विकल्प के रूप में रखने को था। जिसमें मतदाता स्वेच्छा से इसे आधार से लिंक करा सकते है।

पिछले कुछ सालों में स्वैच्छिक रूप से करीब 65 करोड़ मतदाताओं ने इसे आधार से लिंक करा दिया है। ऐसे में मौजूदा समय में कुल करीब 99 करोड़ मतदाताओं में से सिर्फ 34 करोड़ ही आधार से अब तक नहीं चुके है, जो पूरी मतदाता सूची में गड़बड़ी की मुख्य वजह है। 

निजता में दखल पर विवाद
  • आयोग से जुड़े सूत्रों की मानें, तो अब जब आधार सभी बैंक खातों से लेकर स्कूलों और मकान की रजिस्ट्री तक में अनिवार्य कर दिया गया है, तो फिर इसे मतदाता सूची से जोड़ने में क्या दिक्कत है। रही बात निजता की तो यदि बैंक और स्कूलों में आधार देने से किसी तरह की निजता का हनन नहीं होता है, तो चुनाव आयोग को देने में कैसे होगा।
  • वह भी तब जब आयोग अपने किसी डाटा को सरकार या किसी दूसरे के साथ साझा नहीं करता है। सूत्रों की मानें तो आयोग ने मतदाता सूची को आधार से जोड़ने से जुड़ी अपनी तैयारी में एक नया सॉफ्टवेयर भी तैयार कराया है।
  • जिसमें आधार का कोई डाटा नहीं लिया जाएगा, सिर्फ मतदाता सूची के नाम को ही आधार से प्रमाणित किया जाएगा। ताकि एक नाम के दो मतदाता हो तो उनकी पहचान की जा सके।
आधार से लिंक करना अंतिम रास्ता

यह फिर एक मतदाता के नाम जो जगह से जुड़े है तो उन्हें भी पहचान कर हटाया जा सके। आयोग से वरिष्ठ अधिकारियों की मानें तो मतदाता सूची से जुड़े विवाद को खत्म करने का सिर्फ एक रास्ता है, वह उसे आधार से लिंक करना है।

गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को आधार से जोड़ने की पहल 2015 में की थी, जिस पर कुछ काम भी हुआ था लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में इसे निजता का मामला बताते हुए रोक लगा दी थी। 

Red Max Media
Author: Red Max Media

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