
दिल्ली में एक जमीन को लेकर पिछले 2-3 सालों से विवाद की स्थिति बन रही है, जिसे लेकर बीजेपी सांसद ने सदन के दौरान अपनी बात रखी।
बीते दिन लोकसभा में वक्फ बिल पर हुई चर्चा के दौरान भाजपा सांसद कमलजीत सेहरावत ने खुद को वक्फ का पीड़ित बताया था, इसके बाद से ही पोचनपुर गांव के साथ श्मशान घाट चर्चा में बन गई है। संसद में बीजेपी सांसद कमलजीत सेहरावत ने बताया कि द्वारका के अम्बरहाई गांव में उनका खुद का घर है वहां से 200 मीटर दूर मंदिर पर वक्फ बोर्ड के लोगों ने वक्फ की जमीन होने का दावा किया।
मंदिर की जमीन को बताया था वक्फ की प्रॉपर्टी
जबकि स्थानीय लोगों के मुताबिक, 1508 से यहां एक शिव मंदिर बना हुआ है। इस मंदिर में 36 बिरादरी के लोग सैकड़ों सालों से पूजा करते आ रहे थे, घर या जीवन में कोई भी शुरुवात करने से पहले इस मंदिर में पूजा की जाती है, लेकिन अचानक कुछ लोग 2-3 साल पहले आए और इस मंदिर की जमीन को वक्फ की जमीन बताने लगे। यहां तक की वे अपने साथ हरे रंग की चादर लाकर नमाज अदा करने लगे, हाल ही में ईद पर लोगों ने यहां नमाज अदा की।

DDA ने की थी जमीन एक्वायर
जानकारी के मुताबिक, साल 1987 में ये जमीन DDA ने एक्वायर कर ली थी, लेकिन गांव वालों की रिक्वेस्ट के बाद मंदिर अभी भी अस्तित्व में है, लेकिन इसके बाद भी वक्फ बोर्ड ने उसे अपनी जमीन होने का दावा किया। बता दें कि अंबरहाई गांव से सटा हुआ गांव है पोचनपुर, यह गांव जाटों का गांव है, इस गांव का इतिहास भी काफी पुराना है, इस गांव के साथ श्मशान घाट बना हुआ है और यह श्मशान घाट DDA के पार्क में आता है।

गांववालों ने बताई सच्चाई
इंडिया टीवी ने जब यहां जाकर गावं वालों के सच जानने की कोशिश की तो लोगों ने दावा किया कि यहां श्मशान घाट के अंदर कुछ लोग आते हैं और नमाज पढ़ते हैं और यह दावा करते हैं कि जमीन उनकी है, जबकि गांव के लोगों का यह दावा है कि यह जमीन पहले पोचनपुर गांव के लोगों की होती थी, लेकिन 1987 में यह जमीन DDA ने एक्वायर कर ली और उसके बाद यहां पार्क बना दिया गया। अब गांव के लोगों का आरोप है कि कुछ लोग इसे अब वक्फ बोर्ड की जमीन बता रहे हैं जो कि गलत है।








