
माओवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है, सुरक्षा बलों ने एक बेहद खुंखार नक्सली को दबिश देकर गिरफ्तार किया है। वह किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के फिराक में था।
ओडिशा में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही मुहिम को एक बड़ी सफलता मिली है। सुरक्षा बलों ने एक कुख्यात और वांछित माओवादी नेता कुंजम हिडमा को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी कोरापुट जिले के बाईपारिगुड़ा थाना क्षेत्र के पेठागुड़ा जंगल में की गई। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने एक AK-47 राइफल समेत कई अन्य हथियार बरामद की है। सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा बलों को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ माओवादी इलाके में छिपे हुए हैं। इसके बाद एक सर्च ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें पेठागुड़ा के घने जंगल में छिपे हुए कुंजम हिडमा को घेरकर गिरफ्तार किया गया।
नक्सली के पास से क्या-क्या मिला?
हिडमा के पास से सुरक्षा बलों ने एक एके-47 राइफल, 34 राउंड गोली, 27 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, 90 नॉन इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, 2 किलो गन पाउडर, 2 स्टील कंटेनर, 2 रेडियो, 1 ईयरफोन, एक मोटोरोला वॉकीटॉकी और उसकी बैटरी, 2 चाकू, 1 कटारी, माओवादी से जुडे किताबें आदि बरामद की गई हैं।
बड़ी घटना की तैयारी में था हिडमा
कार्रवाई के दौरान इन हथियार की बरामदगी से साफ होता है कि हिडमा किसी बड़ी घटना की तैयारी में था। कुंजम हिडमा नक्सल संगठन का एरिया कमिटी मेंबर (ACM) था। हिडमा की गिरफ्तारी को नक्सल नेटवर्क पर बड़ी चोट माना जा रहा है। इससे न केवल इस क्षेत्र में माओवादियों के मनोबल को झटका लगा है, बल्कि उनके नेटवर्क को कमजोर करने में भी मदद मिलेगी। पुलिस अब हिडमा से पूछताछ करेगी, ताकि उसके संपर्क में रहने वाले अन्य माओवादियों और उनके ठिकानों की जानकारी मिल सके। अधिकारियों का कहना है कि वे इस गिरफ्तारी के जरिए पूरा नेटवर्क खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
14 साल की उम्र में बना था नक्सली
सुरक्षा बलों ने बताया कि हिडमा ने माओवादी संगठन को 14 साल की आयु में 2007 में ज्वाइन किया था, इस दौरान वह माओवादी संगठन के दो विंग बल संघम और जन नाट्य मंडली में काम किया। 2007 से 2013 तक वह बाल संघम और जेएनएम से जुड़ा रहा। फिर 2013 से 2015 के बीच उसने उसूर लोकल ऑर्गनाइजेशन स्क्वाड (एलओएस) के तहत एक पार्टी सदस्य के रूप में काम किया और सैन्य प्रशिक्षण हासिल की, इसी दौरान उसे संगठन की ओर से सिंगल-शॉट राइफल दी थी।
कई जगह किया काम
फिर 2016 में उसने एओबी (आंध्र ओडिशा बॉर्डर) प्लाटून में काम करना शुरू किया और बाद में 2019 में उसे एसीएम (एरिया कमेटी मेंबर) के पद पर प्रमोट किया गया और एक एसएलआर राइफल दी गई। इसने सुरेश (एसजेडसीएम) के अधीन भी एक सैन्य प्लाटून में काम किया, जो कोरापुट जिले के बोइपारीगुडा क्षेत्र, मलकानगिरी जिले (ओडिशा) के कट-ऑफ क्षेत्र और एएसआर जिले (आंध्र प्रदेश) के पेदाबैलु क्षेत्र में कार्यरत था।
सुकमा में भी किया काम
इसके बाद 2021-2022 के दौरान, उन्हें छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के पामेड़ क्षेत्र में कार्यरत एओबी प्लाटून सेक्शन-01 में नियुक्त किया गया था। 2023 में, उन्हें सुकमा जिले के अंतर्गत केरलपाल क्षेत्र में प्लाटून-24 में ट्रांसफर कर दिया गया और 2024 में, अस्थायी रूप से प्लाटून-26 में भेजा गया, जो सुकमा के मालेंगिरी क्षेत्र में रहता है। वह मई 2025 में एओबी इकाई में लौट आया और तब से एक्टिव था।








