
सूत्रों ने बताया कि ईडी के अधिकारी ठेकेदारों और निजी संस्थाओं के कम से कम 37 परिसरों की तलाशी ले रहे हैं। यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कुछ नेताओं के परिसरों में भी तलाशी ली जा रही है या नहीं।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने आज 37 ठिकानों पर छापे मारे। ईडी के एक्शन से हड़कंप मच गया। जानकारी के मुताबिक दिल्ली के स्कूलों में कक्षा निर्माण ‘घोटाले’ की मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत कई परिसरों पर छापेमारी हुई। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। यह घोटाला कथित तौर पर पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी सरकार के दौरान हुआ था।
पीएमएलए के तहत दर्ज हुआ था केस
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की प्राथमिकी का संज्ञान लेते हुए धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत आपराधिक मामला दर्ज करने के बाद छापेमारी की। सूत्रों ने बताया कि ईडी के अधिकारी ठेकेदारों और निजी संस्थाओं के कम से कम 37 परिसरों की तलाशी ले रहे हैं। यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कुछ नेताओं के परिसरों में भी तलाशी ली जा रही है या नहीं।
FIR में AAP के इन नेताओं के नाम
ईडी ने 30 अप्रैल को दर्ज अपनी प्राथमिकी (FIR) में आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार में मंत्री रहे मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के खिलाफ मामला दर्ज किया था। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि दिल्ली सरकार के स्कूलों में 12,000 से अधिक कक्षाओं या अर्ध-स्थायी संरचनाओं के निर्माण में 2,000 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताएं की गईं।
क्या है क्लास रूम घोटाला
दिल्ली का क्लासरूम घोटाला दिल्ली सरकार के सरकारी स्कूलों में क्लासरूम के निर्माण में हुए कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है। यह घोटाला आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान हुआ बताया जा रहा है।
आरोप
- आरोपों के मुताबिक 12,748 क्लासरूम के निर्माण में करीब 2000 करोड़ की वित्तीय अनियमितताएं पाई गईं।
- हर क्लास के निर्माण की लागत 24.86 लाख रु. बताई गई जबकि आरोप है कि आम तौर पर ऐसे निर्माण की लागत 5 लाख रुपये के आसपास होती है
- सरकारी नियमों के उल्लंघन का आरोप, उचित टेंडर प्रक्रिया का पालन किए बिना ही ठेके AAP से जुड़े ठेकेदारों को दिए गए।
- कई क्लास रूम का निर्माण निर्धारित समय सीमा में नहीं हुआ और निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए।
- सीमेंट (RCC) से बनने वाले क्लासरूम की लागत पर सेमी-पक्के स्ट्रक्चर बनाए गए, जिनकी उम्र बहुत कम होती है।
- तत्कालीन मंत्री मनीष सिसोदिया (शिक्षा मंत्री) और सत्येंद्र जैन (लोक निर्माण विभाग मंत्री) ने अपने पद का दुरुपयोग किया
- मनमाने तरीके से क्लासरूम की लागत और आकार बढ़ाकर इसका फायदा उठाया, सरकारी नियमों का पालन नहीं किया
- जांच एजेंसियां इस मामले में ठेकेदारों, निजी फर्मों, इंजीनियरों और अधिकारियों से पूछताछ कर रही हैं।








