ईरान ने इजरायली हमलों में मारे गए कमांडरों और वैज्ञानिकों का किया अंतिम संस्कार

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ईरान ने इजरायल के साथ जंग में मारे गए सेना के कमांडरों और वैज्ञानिकों का किया अंतिम संस्कार
इजरायल के साथ जंग में मारे गए लोगों के लिए ईरानी राष्ट्रपति का खुद सामने आकर अंतिम यात्रा में शामिल होना यह संकेत देता है कि सरकार पीछे हटने को तैयार नहीं है। लेकिन सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है, और आने वाले दिनों में यह स्थिति और संवेदनशील हो सकती है।

ईरान इजरायल के साथ जंग में मारे गए अपने देश के सैन्य कमांडरों और परमाणु वैज्ञानिकों का अंतिम संस्कार कर दिया है। इस अंतिम यात्रा में ईरान में लोगों का भारी हुजूम उमड़ा। इस दौरान जंग में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने शुक्रवार को राजधानी तेहरान में उन लोगों की अंतिम यात्रा में भाग लिया जिन्हें ईरानी अधिकारियों ने “इज़रायली आक्रमण में शहीद” बताया है। यह जुलूस उस हमले के बाद निकाला गया जिसमें कहा गया कि इज़राइली सेना (IDF) ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को निशाना बनाने की कोशिश की थी। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इस खबर के बाद क्षेत्रीय तनाव और अधिक बढ़ गया है।

 

पेजेशकियन ने दिया ये संदेश

राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने इस मौके पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि “ईरान किसी भी विदेशी आक्रमण का मुंहतोड़ जवाब देगा। हम अपने देश की संप्रभुता और जनता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।” भीड़ में मौजूद हजारों लोगों ने “मौत हो इज़राइल” जैसे नारे लगाए और इस कार्रवाई के जवाब में कड़े कदम की मांग की। इस बीच, सुरक्षा विश्लेषकों और मीडिया रिपोर्ट्स में यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या ईरानी राष्ट्रपति की जान को भी खतरा है, खासकर ऐसे समय में जब IDF पर सर्वोच्च नेता को निशाना बनाने का आरोप है। हाल के वर्षों में इज़राइल और ईरान के बीच छाया युद्ध (shadow war) और अधिक खतरनाक रूप ले चुका है, जिसमें वैज्ञानिकों की हत्याएं, सैन्य ठिकानों पर हमले और साइबर युद्ध शामिल रहे हैं।

ईरानी राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर खतरा

ईरान की सुरक्षा एजेंसियों ने राष्ट्रपति और अन्य शीर्ष नेताओं की सुरक्षा बढ़ा दी है। तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों में अतिरिक्त सैन्य बलों की तैनाती की गई है और प्रमुख सरकारी भवनों की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि राष्ट्रपति पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए देश सतर्क है।

पश्चिम एशिया में गहराया तनाव

इस घटना के बाद से पश्चिम एशिया में तनाव और अधिक गहरा गया है। ईरान समर्थित गुटों जैसे हिज़बुल्ला और यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इस हमले की निंदा की है और प्रतिशोध की चेतावनी दी है। वहीं इज़राइल की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न सिर्फ ईरान-इज़राइल रिश्तों को और खराब करेगा, बल्कि पूरा क्षेत्र एक नए संघर्ष की ओर जा सकता है। वहीं आम जनता के बीच गुस्सा साफ दिख रहा है, जो जवाबी कार्रवाई की मांग कर रही है।

 

 

 

ईरान के इन प्रमुख जनरलों की हुई थी मौत

इजरायल के साथ 12 दिनों के युद्ध के दौरान रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख और अन्य वरिष्ठ सैन्य कमांडरों व कई परमाणु वैज्ञानिकों की मौत हो गई थी। इनकी अंतिम यात्रा में शनिवार को तेहरान की सड़कों पर हजारों लोग उमड़े। राजधानी तेहरान की आजादी स्ट्रीट पर ट्रकों में रखे ताबूतों में रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख जनरल हुसैन सलामी, बैलिएस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के प्रमुख जनरल आमिर अली हाजीजादेह और अन्य अधिकारियों को अंतिम विदाई दी गई। जनरल सलामी और हाजीजादेह दोनों 13 जून, यानी युद्ध के पहले दिन ही मारे गए थे, जब इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करने के उद्देश्य से व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया था। इस अभियान में सैन्य कमांडरों, वैज्ञानिकों और परमाणु प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। ईरान की सरकारी टीवी के मुताबिक, शनिवार को कुल 60 लोगों का अंतिम संस्कार किया गया, जिनमें चार महिलाएं और चार बच्चे भी शामिल थे। अधिकारियों ने सरकारी कर्मचारियों को समारोह में भाग लेने की अनुमति देने के लिए सरकारी कार्यालय बंद कर दिए।

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Author: Red Max Media

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