
पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम के 123वें एपिसोड में योग दिवस पर बात की और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की सफलता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गुजरात के बड़नगर में 2121 लोगों ने एक साथ भुजंगासन किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मन की बात का 123वां एपिसोड रविवार (29 जून) को प्रसारित हुआ। 22 भाषाओं में प्रस्तुत होने वाले इस कार्यक्रम की शुरुआत पीएम मोदी ने योग दिवस पर चर्चा से की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस लगातार भव्य होता जा रहा है। पीएम ने तेलंगाना में दिव्यांगजनों के योग से लेकर कश्मीर में जवानों के योग तक का जिक्र किया। पीएम ने तीर्थ यात्रियों की मदद करने वाले लोगों के बारे में बात करते हुए कैलाश पर्वत का जिक्र किया और कहा कि अमरनाथ यात्रा तीन जुलाई से शुरू हो रही है। पीएम ने तीर्थ यात्राओं पर जाने वाले सभी लोगों को और उनकी मदद करने वाले लोगों को शुभकामनाएं दीं।
इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत की उपलब्धियों की तारीफ की है। आंखों की बीमारी ट्रैकोमा देश में एक समय पर आम थी। इलाज नहीं मिलने पर इससे लोग अंधे भी हो जाते थे, लेकिन भारत सरकार ने इसे खत्म करने का संकल्प लिया। अब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत को ट्रैकोमा फ्री घोषित कर दिया है। विश्व स्वाथ्य संगठन ने भी इस बात की तारीफ की है कि भारत ने बीमारी को दूर करने के साथ ही उसके कारणों को भी खत्म किया है।
भारत के 64 फीसदी लोगों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ
इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत में 64 फीसदी लोगों को किसी न किसी सामाजिक योजना का लाभ मिल रहा है। 2014 तक यह आंकड़ा बेहद कम था, लेकिन अब इसमें सुधार हुआ है। यह भारत के लिए गर्व की बात है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में अमरनाथ यात्रा और जगन्नाथ रथ यात्रा का भी जिक्र किया।
इमरजेंसी के समय की आलोचना
पीएम मोदी ने आपातकाल का समय याद करते हुए कहा कि इमरजेंसी के समय पर अभिव्यक्ति की आजादी खत्म कर दी गई थी। लोगों पर अत्याचार हुआ था, लेकिन भारत की जनता नहीं हारी और इमरजेंसी खत्म होने के बाद इसे लगाने वाले लोग चुनाव हार गए थे। पीएम ने कहा कि हमें आपातकाल का विरोध करने वाले लोगों को याद रखना चाहिए। इससे हमें अपने संविधान को बचाए रखने की ऊर्जा मिलती है। पीएम ने अपने संबोधन में बोरोलैंड के फुटबॉल टूर्नामेंट के बारे में भी बताया, जिसमें हजारों टीमें शामिल हैं। बोरोलैंड एक समय पर संघर्ष के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यहां के लोग भी मुख्य धारा में शामिल हो गए हैं और असम से बाहर निकलकर अपनी पहचान बना रहे हैं।








