
तेहरान के साथ हुए समझौते से परमाणु निगरानी संस्था को ईरानी परमाणु प्रतिष्ठानों के निरीक्षण की प्रक्रिया पुनः शुरू करने की अनुमति मिल जाती, क्योंकि जून में अमेरिकी हवाई हमलों के बाद देश के नेतृत्व ने इन्हें स्थगित कर दिया था।
ईरान के विदेश मंत्री और अमेरिका व यूरोपीय संघ के साथ ईरानी परमाणु समझौते के शीर्ष वार्ताकार ने कहा है कि तेहरान ने अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ काहिरा समझौते के कार्यान्वयन को निलंबित कर दिया है।
उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच आम सहमति बनने तक IAEA के साथ सहयोग अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।
तेहरान के साथ हुए इस समझौते से परमाणु निगरानी संस्था को ईरानी परमाणु प्रतिष्ठानों के निरीक्षण उपायों को फिर से शुरू करने की अनुमति मिल जाती, क्योंकि जून में अमेरिकी हवाई हमलों के बाद देश के नेतृत्व ने इन्हें निलंबित कर दिया था।
यह समझौता उस समय भी महत्वहीन हो गया जब 2015 के परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने संयुक्त राष्ट्र प्रोटोकॉल के तहत ईरान पर फिर से प्रतिबंध लगा दिए। अराघची ने एक साक्षात्कार के दौरान कहा कि उनका देश काहिरा समझौते पर लौटने के लिए तैयार है, बशर्ते “ईरानी राष्ट्र के अधिकारों की रक्षा करने वाले निष्पक्ष प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाएँ।”
उन्होंने आगे कहा, “मौजूदा परिस्थितियों में, तेहरान को ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी सहित ई3 देशों के साथ परमाणु वार्ता जारी रखने की कोई उम्मीद और तर्क नहीं दिखता। हमें यूरोपीय देशों के साथ बातचीत का कोई आधार नहीं दिखता।”
पश्चिमी देश लंबे समय से ईरान पर परमाणु हथियार बनाने का आरोप लगाते रहे हैं, जबकि ईरान ने अतीत में इन आरोपों का पुरज़ोर खंडन किया है। वे इस बात पर ज़ोर देते हैं कि यह कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
अमेरिका और इज़राइल, विशेष रूप से, इस बात से चिंतित हैं कि तेहरान द्वारा परमाणु हथियार हासिल करने से क्षेत्र पर भारी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। ट्रम्प प्रशासन ने इस साल की शुरुआत में ईरान के साथ परमाणु वार्ता फिर से शुरू करने की कोशिश की थी, लेकिन जून में इज़राइली हमलों के बाद ईरानी परमाणु, सैन्य और आवासीय स्थलों को निशाना बनाकर यह प्रयास विफल हो गया।








