शेख हसीना के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी

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शेख हसीना
पांच अगस्त को प्रधानमंत्री पद और देश छोड़ने वालीं शेख हसीना के खिलाफ अब बांग्लादेश में गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। शेख हसीना के खिलाफ हत्या समेत कई मामलों में जांच चल रही है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार मानवाधिकार हनन की भी जांच करने में जुटी है। शेख हसीना पर आरोप हैं कि उन्होंने अपने 15 साल के कार्यकाल में जबरन लोगों को निशाना बनाया।

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दरअसल, बांग्लादेश की एक अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। अदालत ने 18 नवंबर तक शेख हसीना को पेश होने का आदेश दिया है।

बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) के मुख्य अभियोजक मोहम्मद तजुल इस्लाम ने इस बात की जानकारी साझा की। शेख हसीना के खिलाफ बांग्लादेश में मानवाधिकार हनन से जुड़े कई मामलों की जांच चल रही है। उन पर छात्र आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले कई छात्रों की हत्या का भी आरोप है।

बांग्लादेश में उठ चुकी प्रत्यर्पण की मांग

बांग्लादेश में कई बार शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग उठ चुकी है। इस मामले में भारत के सामने कूटनीतिक संकट भी खड़ा हो गया है। माना जा रहा है कि शेख हसीना की वजह से दोनों देशों के बीच संबंधों पर भी असर पड़ सकता है। दरअसल, भारत और बांग्लादेश के मध्य एक प्रत्यर्पण संधि 2013 में हुई थी। अब सवाल उठता है कि अगर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग करती है तो क्या भारत उसके अनुरोध को स्वीकार करेगा?

क्या है भारत-बांग्लादेश के बीच संधि?

भारत और बांग्लादेश के मध्य हुई प्रत्यर्पण संधि के मुताबिक सीमा पर उग्रवाद, आतंकवाद व राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा करने वाले अपराधियों को किसी भी देश के अनुरोध पर वापस भेजा जाएगा। खास बात यह है कि व्यक्ति पर लगे आरोप दोनों ही देशों में दंडनीय अपराध के तहत वर्गीकृत होने चाहिए।

प्रत्यर्पण से मना कर सकता है भारत

शेख हसीना पर नरसंहार, हत्या समेत कई गंभीर आरोप लगे हैं। 2016 के संशोधन के मुताबिक प्रत्यर्पण के लिए सुबूतों की जरूरत को भी खत्म कर दिया गया है।अब अगर किसी भी देश की अदालत ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है तो प्रत्यर्पण करना होगा। हालांकि संधि के अनुच्छेद 6 के मुताबिक अगर अपराध राजनीति प्रकृति का है तो प्रत्यर्पण से इनकार किया जा सकता है। इसके अलावा सैन्य अपराध से जुड़े मामलों में भी प्रत्यर्पण से मना किया जा सकता है।

पांच अगस्त को छोड़ा था देश

इसी साल जुलाई महीने में बांग्लादेश में आरक्षण के खिलाफ राष्ट्रव्यापी छात्र आंदोलन हुआ था। एक महीने तक चले आंदोलन में 400 से अधिक लोगों की जान गई थी। इसके बाद उग्र छात्रों ने राजधानी ढाका की तरफ कूच किया था। पांच अगस्त को सुरक्षा कारणों के चलते शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और सेना के हेलीकॉप्टर से भारत आ गई थीं। तब से शेख हसीना ने भारत में शरण ले रखी है।

Red Max Media
Author: Red Max Media

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