ये किताब बताएगी बोधगया की सांस्कृतिक

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ये किताब बताएगी बोधगया की सांस्कृतिक
मशहूर लेखिका डॉ. कायनात काजी ने बोधगया के विहारों पर एक किताब लिखी है, जिसे शुक्रवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज में जारी किया गया. इस कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद सुधा मूर्ति, बीजेपी की वनथी श्रीनिवासन और पद्म श्री केके मोहम्मद आदि शामिल थे. इस किताब के माध्यम से बच्चों को बोधगया की सांस्कृतिक विरासत और इतिहास के बारे में जानने का मौका मिलेगा.

दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज में शुक्रवार को बोधगया के विहार पुस्तक का विमोचन हुआ. यह किताब बोधगया की सांस्कृतिक विरासत के बारे में बताएगी, जिससे बच्चों को इतिहास के बारे में जानने का मौका मिलेगा. इस किताब को डॉ. कायनात काजी ने लिखा है. उन्होंने बताया कि इस कॉफी टेबल बुक में बोधगया स्थित 41 बौद्ध विहारों का डॉक्यूमेंटेशन किया गया है. इस पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में भारत की जानी-मानी लेखिका, समाज सेविका, राज्यसभा सांसद और इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति की पत्नी सुधा मूर्ति भी शामिल हुईं. इस मौके पर उन्होंने भगवान बुद्ध और बोधगया से जुड़ी कई सारी बातें कही. उन्होंने कहा कि बुद्ध एक ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने शांति की स्थापना की थी.

सुधा मूर्ति ने कहा कि ‘भारत का युवा अगर अपने देश के इतिहास को नहीं जानेगा, तो वो भविष्य को भी नहीं जान पाएगा. भारतीय इतिहास का सही तरीके से डॉक्यूमेंटेशन नहीं किया गया, इसलिए बहुत सारे जरूरी फैक्ट्स आज हमारे सामने नहीं हैं. हम अपने इतिहास से बहुत कुछ सीखते हैं. भारत को सिर्फ बॉलीवुड और सॉफ्टवेयर के लिए न जाना जाए बल्कि इसकी महान संस्कृति के लिए पूरी दुनिया में पहचान मिले, ये भी बहुत जरूरी है’.

सराहनीय पहल है ये किताब

वहीं, इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं बीजेपी के महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष वनथी श्रीनिवासन ने कहा कि बोधगया के विहारों पर लिखी गई यह किताब एक सराहनीय पहल है. इस तरह की किताबों से भारतीय संस्कृति को करीब से समझने का मौका मिलता है. इसके अलावा कार्यक्रम में शामिल पद्म श्री विजेता केके मोहम्मद ने किताब की लेखिका कायनात काजी की तारीफ करते हुए कहा कि अगर कोई शानदार फोटोग्राफर लेखक भी हो तो वो भारतीय संस्कृति के बारे में और सुंदर तरीके से बता सकता है और यह किताब उसी का एक बेहतरीन उदाहरण है.

कहां है बोधगया?

बोधगया बिहार में है, जो राज्य की राजधानी पटना से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. बोधगया का महाबोधि मंदिर परिसर बौद्ध मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है. इस परिसर में सबसे पहला मंदिर तीसरी शताब्दी ई.पूर्व. में सम्राट अशोक ने बनवाया था और उसके बाद यहां कई सारे मंदिरों का निर्माण हुआ. इस जगह को भगवान बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति का स्थल माना जाता है. यहीं पर बोधि वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ था.

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Author: Red Max Media

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