
1957 में बनी मुंगेर विधासभा सीट पर अक्सर समाजवादी विचारधारा वाले नेताओं को जीत मिली है। हालांकि, यहां कभी भी किसी एक पार्टी का दबदबा नहीं रहा है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मुंगेर की सीट बेहद अहम रहने वाली है। मुंगेर में फिलहाल बीजेपी के विधायक हैं। हालांकि, 2020 में उन्हें करीबी अंतर से जीत मिली थी। ऐसे में इस बार भी यहां एनडीए और विपक्षी गठबंधन के बीच कांटे की टक्कर होने की उम्मीद है। इस सीट पर कभी भी एक पार्टी का दबदबा नहीं रहा है, लेकिन पिछले कुछ चुनावों में यहां बीजेपी की पकड़ मजबूत हुई है। मुंगेर सीट 1957 में बनी थी। इसके बाद से यहां 17 चुनाव हो चुके हैं, लेकिन कोई भी पार्टी तीन बार से ज्यादा जीत नहीं दर्ज कर पाई है।
मुंगेर में कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल-यूनाइटेड को तीन-तीन बार जीत मिली है, जबकि जनता दल को दो बार जीत मिली है। संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, जनता पार्टी और जनता पार्टी (सेक्युलर) ने एक-एक बार यह सीट जीती है।
लोकसभा चुनाव में जेडीयू का जलवा
लोकसभा चुनाव में लंबे समय से जनता दल यूनाइटेड का जलवा बरकरार है। नीतीश की पार्टी के सीनियर नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने पिछले चार चुनाव में से तीन बार इस सीट पर जीत दर्ज की है। ऐसे में एनडीए उम्मीदवार के लिए इस बार भी जीत हासिल करना मुश्किल नहीं होगा। हालांकि, आरजेडी और कांग्रेस का गठबंधन उन्हें कड़ी चुनौती देने की कोशिश करेगा। पारंपरिक रूप से यहां एनडीए की राह आसान है, लेकिन प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी समीकरण सभी के लिए चुनौतीपूर्ण बनाती है।
क्या हैं मौजूदा समीकरण?
2020 विधानसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार ने महज 1244 वोट से यह सीट जीती थी। ऐसे में इस बार भी आरजेडी और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर रहने की उम्मीद है। हालांकि, पिछले चुनाव में चिराग पासवान की लोजपा ने एनडीए उम्मीदवारों को खासा नुकसान पहुंचाया था और मुंगेर भी उन सीटों में से एक थी, जहां एनडीए को भारी नुकसान हुआ था। ऐसे में इस बार चिराग के साथ आने से बीजेपी को सीधा फायदा मिलेगा और लगातार दूसरी बार बीजेपी को यहां जीत मिल सकती है।








