
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में एंटी-करप्शन ब्यूरो ने रिटायर्ड IAS अधिकारी निरंजन दास को गिरफ्तार किया। उन पर शराब सिंडिकेट को फायदा पहुंचाने, टेंडर में हेराफेरी और गलत शराब नीति लागू करने के आरोप हैं।
छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले के सिलसिले में एंटी-करप्शन ब्यूरो और इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ACB/EOW) ने रिटायर्ड IAS अधिकारी निरंजन दास को गिरफ्तार किया है। ACB/EOW के एक अधिकारी ने बताया कि निरंजन दास, जो उस वक्त राज्य के आबकारी विभाग के कमिश्नर थे, को इस घोटाले में शामिल एक सिंडिकेट की मदद करने के आरोप में हिरासत में लिया गया है।
रिटायर्ड IAS अधिकारी पर क्या है आरोप?
अधिकारी के मुताबिक, निरंजन दास ने शराब घोटाले के इस सिंडिकेट को कई तरह से फायदा पहुंचाया। उन पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी शराब दुकानों में बिना हिसाब की शराब बेचने, अधिकारियों के तबादले, टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर, और गलत शराब नीति लागू करने में मदद की। इसके बदले में उन्हें करोड़ों रुपये का अनुचित लाभ मिला। ACB/EOW ने बताया कि निरंजन दास को शुक्रवार को स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा। दास इस मामले में गिरफ्तार होने वाले दूसरे पूर्व IAS अधिकारी हैं।
2019 से 2022 के बीच का है मामला
ED के मुताबिक, यह घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ, जब छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार सत्ता में थी। ED का दावा है कि इस दौरान 2500 करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला हुआ। इस मामले में ED मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा है। ACB/EOW ने पिछले साल 17 जनवरी को इस घोटाले में FIR दर्ज की थी, जिसमें 70 लोगों और कंपनियों के नाम शामिल थे। इनमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड का नाम भी था। यह कार्रवाई 2023 के विधानसभा चुनाव में BJP के सत्ता में आने के एक महीने बाद शुरू हुई थी।
शराब घोटाला केस में अब तक क्या हुआ?
ED के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में एक आपराधिक सिंडिकेट ने शराब की बिक्री में अवैध कमीशन वसूला और सरकारी शराब दुकानों के जरिए बिना अनुमति के शराब बेची। इस तरह बड़े पैमाने पर कालेधन की हेराफेरी की गई। ACB/EOW ने इस मामले में एक मुख्य चार्जशीट और 4 सप्लिमेंट्री चार्जशीट दाखिल की हैं। अब तक एक दर्जन से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। ED ने भी इस मामले में कई बड़ी गिरफ्तारियां की हैं, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, पूर्व मंत्री कवासी लखमा, व्यवसायी अनवर ढेबर, पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, और इंडियन टेलीकॉम सर्विस (ITS) अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी शामिल हैं।








