
अभी तक ऐसा देखा गया है कि आमतौर पर महाराष्ट्र में बिजली कर्मचारी एक से दो दिनों की ही हड़ताल करते रहे हैं। करीब 15 से 17 साल के बाद ऐसा हो रहा है कि बिजली कर्मचारी 72 घंटे की हड़ताल पर गए हैं।
महाराष्ट्र में बिजली का संकट गहरा सकता है। वहां बिजली कर्मचारी 72 घंटे की हड़ताल पर चले गए हैं। बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात ठीक 12:00 बजे से प्रदेश बिजली कर्मी 72 घंटे की हड़ताल पर चले गए हैं। श्रमिक संगठनों का दावा है कि तीन दिन की हड़ताल में राज्य में बिजली संकट के खड़े होने के आसार हैं। उधर बिजली कंपनियों ने भी हड़ताल से निपटने के लिए कमर कस ली है
हडताली कर्मचारियों का कहना है कि यह हड़ताल बिजली उद्योग के असंवैधानिक निजीकरण के विरोध में की जा रही है। 6 अक्टूबर को महावितरण के निदेशक ऊर्जा विभाग के सचिव और तीनों कंपनियों के संचालकों के साथ हुई बैठक में कोई नतीजा नहीं निकला जिसके बाद विद्युत कर्मी 72 घंटे की स्ट्राइक पर चले गए हैं।
बिजली व्यवस्था पर असर पड़ने के आसार
अभी तक ऐसा देखा गया है कि आमतौर पर महाराष्ट्र में बिजली कर्मचारी एक से दो दिनों की ही हड़ताल करते रहे हैं। करीब 15 से 17 साल के बाद ऐसा हो रहा है कि बिजली कर्मचारी 72 घंटे की हड़ताल पर गए हैं। ऐसे में पूरे राज्य में बिजली व्यवस्था पर असर पड़ने के आसार हैं।
विद्युत भवन के मुख्य गेट पर नारेबाजी
नागपुर में विद्युत कर्मियों ने सरकार के खिलाफ विद्युत भवन के मुख्य गेट पर जमकर नारेबाजी की। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं की जाएगी तब तक वह हड़ताल जारी रहेगी। बिजली कर्मी निजीकरण के प्रयास ,महावितरण की पुनर्रचना ,जल विद्युत परियोजनाओं के निजीकरण, एवं महापारेषण द्वारा 200 करोड़ के ऊपर से प्रोजेक्ट निजी हाथों को सौंपने का विरोध कर रहे हैं।
बिजली कर्मियों का दावा है कि 72 घंटे की हड़ताल की वजह से राज्य में बिजली उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। वहीं बिजली आपूर्ति बिगड़ने के बाद कर्मचारी भी उसकी मरम्मत के लिए नहीं आएंगे। वहीं महावितरण ने हड़ताल को गैरकानूनी बताते हुए अभियंता ,अधिकारी और कर्मचारियों का अवकाश रद्द कर दिया है। साथ ही हड़ताली कर्मचारियों पर एस्मा लगाए जाने की बात भी कही है।








