बिहार चुनाव: क्या “एम” फैक्टर से एनडीए की नैया होगी पार ?

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बिहार चुनाव में महिलाएं एनडीए के लिए सबसे अहम वोटबैंक होंगी

बिहार में इंडि गठबंधन बेरोजगारी को सबसे अहम मुद्दा बना रहा है। वहीं, एनडीए महिला वोट बैंक के भरोसे चुनाव में उतरा है। प्रशांत किशोर बदलाव का दावा कर रहे हैं। ऐसे में बीजेपी की पसंदीदा रणनीति की अग्निपरीक्षा होगी।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सभी दल उम्मीदवारों के चयन और सीट बंटवारे के लिए माथापच्ची कर रहे हैं, लेकिन हर पार्टी का अपना एजेंडा जनता के सामने रख चुकी है। यहां सत्ता की लड़ाई एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच है। किसी भी गठबंधन ने अब तक अपना घोषणापत्र नहीं जारी किया है, लेकिन यह साफ हो चुका है कि बिहार में महिला रोजगार योजना एनडीए गठबंधन का सबसे बड़ा दांव है। वहीं, विपक्षी गठबंधन हर परिवार से एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने का वादा कर रहा है।

प्रशांत किशोर बिहार में बदलाव का दावा कर रहे हैं और औवैसी जैसे नेता भी अपना वोट बैंक रखते हैं, जो कई सीटों पर अहम प्रभाव डालता है। ऐसे में बीजेपी की आजमाई हुई रणनीति की यहां अग्निपरीक्षा होने वाली है।

क्या है बीजेपी का नया एम फैक्टर?

भारतीय जनता पार्टी के लिए महिलाएं पिछले कई विधानसभा चुनावों में सबसे अहम वोट बैंक साबित हुई हैं। महिलाओं के लिए योजनाएं लाकर बीजेपी और एनडीए गठबंधन ने कई राज्यों में जीत हासिल की है। इसकी शुरुआत 2023 में मध्य प्रदेश से हुई थी। यहां शिवराज सिंह चौहान ने लाडली बहना योजना की शुरुआत की और 2018 में करीबी अंतर से चुनाव हारने वाली बीजेपी को बड़े अंतर से जीत मिली। इसके बाद महाराष्ट्र में भी ऐसी ही योजना शुरू कर बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल की, जबकि लोकसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन को भारी नुकसान हुआ था।

पिछले चुनावों का पैटर्न

दिल्ली में भी बीजेपी ने महिलाओं को पेंशन का वादा किया और 27 साल बाद सत्ता में वापसी की। बीजेपी की नकल कर झारखंड में हेमंत सोरेन भी अपनी सरकार बचाने में सफल रहे। मौजूदा समय में झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में महिलाओं के लिए अलग-अलग योजनाएं चलाई जा रही हैं और इन सभी योजनाओं ने चुनाव के नतीजे में अहम रोल अदा किया है। इसी पैटर्न को बीजेपी बिहार में भी आजमा रही है। इससे पहले तीन राज्यों में बीजेपी महिलाओं के लिए पेंशन चलाकर या उसका वादा कर जीत हासिल कर चुकी है।

मोदी और नीतीश का रिकॉर्ड

देश में पिछले कुछ चुनावों में महिलाओं का वोट प्रतिशत पुरुषों से बेहतर रहा है। बिहार में तो 2010 के बाद से पिछले तीन विधानसभा चुनावों में पुरुष मतदाताओं की तुलना में महिला मतदाताओं की संख्या ज्यादा रही है। महिलाओं के पसंदीदा नेताओं में नीतीश और मोदी शामिल हैं। हाल ही में पीएम मोदी ने बिहार में कहा था कि महिलाओं के दो ही भाई हैं। इसमें उन्होंने अपना और नीतीश कुमार का नाम लिया था।

महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में महिलाओं के लिए पेंशन योजना शुरू होने के बाद महिलाओं ने पीएम मोदी का समर्थन किया है। इन महिलाओं का कहना है डबल इंजन की सरकार ने उनके हाथ में पैसा दिया और अब वह अपने घर के फैसले लेने के लिए आजाद हैं। वहीं, नीतीश कुमार ने पिछले 20 साल में महिलाओं के लिए काम किया है, जो उनके पक्ष में जाता है। 2005 में सत्ता में आने के तुरंत बाद उन्होंने लड़कियों को स्कूल जाने के लिए प्रोत्साहित किया और साइकिल और यूनिफॉर्म देने की योजना शुरू की। ये महिलाएं अब मां बन चुकी हैं और घर के अहम फैसले ले रही हैं। इससे नीतीश का वोट बैंक और मजबूत होता है। शराबबंदी का फैसला भी भले ही आलोचना के केंद्र में रहा हो, लेकिन इससे महिलाओं का समर्थन नीतीश को मिला है।

आगामी चुनावों की रणनीति तय करेंगे नतीजे

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे आगामी विधानसभा चुनावों के लिए सभी दलों की रणनीति तय करेंगे। 2026 में पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और केरल में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके बाद उत्तर प्रदेश, गुजरात और पंजाब के चुनावों की दिशा इसी से तय होगी।

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Author: Red Max Media

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