
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में कुख्यात नक्सली मल्लौजुला वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू ने अपने 60 साथियों के साथ सरेंडर कर दिया है।
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में कुख्यात नक्सली मल्लौजुला वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू ने अपने 60 साथियों के साथ सरेंडर कर दिया है। जानकारी के मुताबिक, CPI माओवादी के पोलित ब्यूरो सदस्य वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू ने मंगलवार को महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में 60 माओवादी कार्यकर्ताओं के साथ हथियार डाल दिए। इसे भाकपा माओवादी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
सितंबर में हथियार डालने का दिया था संकेत
आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और देश भर की राज्य सरकारों के नेतृत्व में पुलिस द्वारा चलाए जा रहे निरंतर अभियानों का परिणाम है। सितंबर में सोनू ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर हथियार डालने का संकेत दिया था। उन्हें छत्तीसगढ़ और देश के अन्य हिस्सों में माओवादी कार्यकर्ताओं के एक बड़े हिस्से से समर्थन मिला, जिन्होंने उन्हें समर्थन दिया।
वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू को मिला अन्य साथियों से समर्थन
पुलिस के अनुसार सोनू को भाकपा (माओवादी) के उत्तर उप-क्षेत्रीय और पश्चिम उप-क्षेत्रीय ब्यूरो से समर्थन मिला है, जिन्होंने मुख्यधारा में शामिल होने में रुचि दिखाई है। पुलिस ने कहा कि सोनू ने 15 अगस्त को एक मौखिक और लिखित बयान जारी कर दावा किया था कि वे युद्धविराम के लिए तैयार हैं।
पिछले हफ्ते ऐसी खबरें आईं थीं कि तेलंगाना के मूल निवासी वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। एक पत्र में उन्होंने कार्यकर्ताओं से खुद को बचाने औरव्यर्थ बलिदान न देने का आह्वान किया था, जिससे हथियार छोड़ने और मुख्यधारा में शामिल होने को लेकर माओवादियों के भीतर दरार उजागर हुई थी। कहा जाता है कि पत्र में सोनू ने अपने साथियों से कहा था कि वह वर्तमान परिस्थितियों में सशस्त्र संघर्ष जारी नहीं रख सकते। यह स्वीकार करते हुए कि माओवादियों ने जो रास्ता अपनाया था वह पूरी तरह से गलत था।
गृह मंत्री अमित शाह ने कही थी ये बातें
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले दिनों कहा था कि 2019 के बाद हमने राज्यों के क्षमता निर्माण पर भी बल दिया। SRE और SIS योजना के तहत लगभग 3331 करोड़ रूपए जारी किए गए, जो लगभग 55 प्रतिशत की वद्धि दर्शाता है। इसके माध्यम से फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन बढ़ाए गए और इस पर लगभग 1741 करोड़ रूपए खर्च हुए। उन्होंने कहा कि पिछले 6 साल में 336 नए सीएपीएफ के कैंप बनाकर सुरक्षा के वैक्यूम को भरने का काम मोदी सरकार ने किया। इसके परिणामस्वरूप 2004 -14 के मुकाबले 2014-24 में सुरक्षाबलों की मृत्यु में 73 प्रतिशत की कमी आई औऱ नागरिकों की मृत्यु में 74 प्रतिशत कमी आई। शाह ने कहा कि पहले हमें छत्तीसगढ़ में सफलता नहीं मिलती थी क्योंकि वहाँ विपक्ष की सरकार थी। 2024 में हमारी सरकार बनी और 2024 में किसी एक साल के में सबसे अधिक 290 नक्सलियों को न्यूट्रलाइज़ करने का काम किया गया।
गृह मंत्री ने कहा कि हम किसी को नहीं मारना चाहते। 290 न्यूट्रलाइज़्ड नक्सलियों के मुकाबले 1090 गिरफ्तार किए और 881 ने सरेंडर किया। उन्होंने कहा कि यह बताता है कि सरकार की अप्रोच क्या है। हम पूरा प्रयास करते हैं कि नक्सली को सरेंडर या अरेस्ट करने का पूरा मौका दिया जाता है। लेकिन जब नक्सलवादी हाथ में हथियार लेकर भारत के निर्दोष नागरिकों को मारने निकलते हैं तो सुरक्षाबलों के पास कोई और चारा नहीं होता और उन्हें गोली का जवाब गोली से ही देना होता है। श्री शाह ने कहा कि 2025 में अब तक 270 नक्सलियों को न्यूट्रलाइज़ किया गया है, 680 गिरफ्तार किए गए हैं और 1225 ने आत्मसमर्पण किया है। दोनों वर्षों में आत्मसमर्पण और अरेस्ट की संख्या न्यूट्रलाइज़्ड की संख्या से अधिक है। आत्मसमर्पण करने वालों की संख्या बताती है कि नक्सलियों का समय अब बहुत कम बचा है।








