
वैश्विक समुदाय आशा कर रहा है कि यह “अच्छी बैठक” शांति का मार्ग प्रशस्त करे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिंगपिंग के साथ होने वाली आगामी शिखर बैठक को लेकर उत्साह जताया है, लेकिन साथ ही ताइवान मुद्दे पर सीधी चर्चा का संकेत दिया है। ट्रंप ने कहा, “राष्ट्रपति शी के साथ हमारे पास बहुत कुछ बात करने को है, और उनके पास हमारे साथ बहुत कुछ। मुझे लगता है कि हमारी बैठक अच्छी होगी।” उन्होंने ताइवान पर जोर देते हुए कहा, “मैं ताइवान के बारे में बात करूंगा। वहां नहीं जाऊंगा, लेकिन इस पर चर्चा जरूर करूंगा।
ट्रंप ने कहा-ताइवान के लिए बड़ा सम्मान
ट्रंप ने कहा कि उनके दिल में ताइवान के लिए बहुत सम्मान है। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल करने के बाद ट्रंप ने चीन के खिलाफ कठोर रुख अपनाया है, जिसमें व्यापार युद्ध से लेकर दक्षिण चीन सागर तक की चुनौतियां शामिल हैं। ताइवान खुद को स्वतंत्र मानता है लेकिन बीजिंग इसे अपना अभिन्न अंग बताता है। बैठक में यह मुद्दा केंद्र बिंदु बन सकता है। ट्रंप का यह बयान वाशिंगटन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आया, जहां उन्होंने कहा कि बैठक “उत्पादक” होगी, लेकिन अमेरिकी हितों की रक्षा प्राथमिक रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का ताइवान पर खुला उल्लेख एक रणनीतिक संदेश है।
ट्रंप के पिछले कार्यकाल में भी नाराज था चीन
ट्रंप ने अपने पिछले कार्यकाल में भी ताइवान को हथियार बेचे थे, जिससे चीन नाराज हो गया था। अब, 2025 में वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमजोरी और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच, यह बैठक व्यापार घाटे, बौद्धिक संपदा चोरी और हांगकांग जैसे मुद्दों पर फोकस कर सकती है। ट्रंप ने कहा, “हम सम्मानजनक सौदेबाजी चाहते हैं। शी एक मजबूत नेता हैं, लेकिन अमेरिका कभी पीछे नहीं हटेगा।”चीन की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन बीजिंग ने हमेशा ताइवान को “रेड लाइन” बताया है। अमेरिकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुमनाम रहते हुए कहा, “यह बैठक द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा दे सकती है, लेकिन ताइवान पर अमेरिका का रुख स्पष्ट है—हम लोकतंत्र का समर्थन करते हैं।”
बैठक की तारीख और स्थान नहीं है तय
ट्रंप प्रशासन ने बैठक की तारीख और स्थान की पुष्टि नहीं की, लेकिन संकेत मिले हैं कि यह नवंबर में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में हो सकती है। दक्षिण एशिया और वैश्विक बाजारों पर इसकी नजरें टिकी हैं। यदि ताइवान पर तनाव बढ़ा, तो यह तीसरे विश्व युद्ध की आशंका को जन्म दे सकता है। ट्रंप का “सम्मान” वाला बयान ताइवान को सांत्वना देता है, जहां राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने अमेरिका का धन्यवाद दिया। भारत जैसे देशों के लिए यह अवसर है कि वे क्वाड गठबंधन को मजबूत करें। ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति एक बार फिर परीक्षा की घड़ी में है। क्या यह चीन को झुकाएगी या नया संघर्ष छेड़ेगी? यह बैठक न केवल आर्थिक, बल्कि सामरिक संतुलन बदल सकती है।
रूस के खिलाफ चीन की मदद चाहता है अमेरिका
ट्रंप चाहते हैं कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग रूस के मामले में अमेरिका की मदद करें। बता दें कि यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर रूस और अमेरिका आमने-सामने हैं। रूस को चीन का साथ अमेरिका को रणनीति बनाने में कमजोर कर रहा है। ऐसे में ट्रंप चीन को रूस के खिलाफ अपने पाले में लाना चाहते हैं। इस मुद्दे पर भी वह बातचीत कर सकते हैं।








