कर्नाटक के बीदर में आया भूकंप

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कर्नाटक के बीदर में आया भूकंप

रविवार की सुबह कर्नाटक में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता कम रही, लेकिन लोगों ने इसके बारे में सूचना दी।

कर्नाटक के बीदर जिले में रविवार की सुबह भूकंप का हल्का झटका महसूस किया गया गया। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 2.9 मापी गई। राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र (KSNDMC) ने इस बारे में जानकारी दी। भूकंप का यह झटका सुबह 3.42 बजे महसूस किया गया। इसका केंद्र चिट्टगुप्पा तालुक के भास्करनगर गांव से 2.4 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में पांच किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। केएसएनडीएमसी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि, ‘‘किसी नुकसान की सूचना नहीं है और निवासियों को घबराने की जरूरत नहीं है।’’ भास्करनगर और आसपास के इलाकों के ग्रामीणों ने हल्के भूकंप की सूचना दी, लेकिन कोई नुकसान नहीं हुआ।

क्यों आते हैं भूकंप?

हाल के दिनों में देश-दुनिया के कई इलाकों में भूकंप की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जा रही है। हमारी धरती के भीतर 7 टेक्टोनिक प्लेट्स हैं। ये प्लेट्स लगातार अपने स्थान पर घूमते रहती हैं। हालांकि, कभी-कभी इनमें टकराव या घर्षण भी होता है। इसी कारण धरती पर भूकंप की घटनाएं देखने को मिलती हैं। इसका सबसे ज्यादा नुकसान आम जनजीवन को उठाना पड़ता है। भूकंप से मकानें गिर जाती हैं, जिसमें दबकर हजारों लोगों की मौत हो जाती है।

भारत में क्या हैं भूकंप के जोन

भूगर्भ विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के कुल भूभाग के लगभग 59 फीसदी हिस्से को भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। वैज्ञानिकों ने भारत में भूकंप क्षेत्र को जोन-2, जोन-3, जोन-4 व जोन-5 यानी  4 भागों में विभाजित किया है। जोन-5 के इलाकों को सबसे ज्यादा संवेदनशील माना जाता है, जबकि जोन-2 कम संवेदनशील माना जाता है। हमारे देश की राजधानी दिल्ली भूकंप के जोन-4 में आती है। यहां 7 से अधिक तीव्रता के भी भूकंप आ सकते हैं जिससे बड़ी तबाही हो सकती है। भारत में हिमालय क्षेत्र और कुछ अन्य फॉल्ट लाइनों (जैसे कच्छ, पूर्वोत्तर भारत) के कारण भूकंप का खतरा अधिक है, क्योंकि भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है।

रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता का अंदाजा

4 से 4.9 तीव्रता के भूकंप में घर में रखा सामान अपनी जगह से नीचे गिर सकता है। 5 से 5.9 तीव्रता के भूकंप में भारी सामान और फर्नीचर भी हिल सकता है। 6 से 6.9 में इमारत का बेस दरक सकता है। 7 से 7.9 में इमारतें गिर जाती हैं। 8 से 8.9 में सुनामी का खतरा होता है और ज्यादा तबाही मचती है। 9 या ज्यादा में सबसे भीषण तबाही होती है।

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Author: Red Max Media

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