पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया तुर्किये का हथियार

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भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया तुर्किये का हथियार
पहलगाम के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्ते और बिगड़ गए हैं साथ ही तुर्किये के साथ भी रिश्तों में खटास आ गई है। पाकिस्तान ने भारत के कई शहरों पर तुर्किये में निर्मित ड्रोन से हमला किया। ऑपरेशन सिंदूर के बाद अजरबेजान ने भी पाकिस्तान का समर्थन किया है। भारत अब तुर्किये और अजरबेजान के पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने की कोशिश करेगा।
पहलगाम के बाद जिस तरह से हालात बने हैं, उसमें भारत और पाकिस्तान के रिश्ते तो रसातल में पहुंच ही गए हैं, लेकिन इसके साथ तुर्किये के साथ भी भारत के रिश्तों के और ज्यादा खराब होने की जमीन तैयार हो गई है। 

वजह यह है कि पाकिस्तान ने आठ मई, 2025 को भारत के तकरीबन दो दर्जन शहरों पर जिस ड्रोन से हमला किया है, वे सारे तुर्किये निर्मित हैं। भारत के विरुद्ध पहली बार तुर्किये निर्मित हथियारों का इस्तेमाल किया गया है जो भारत और तुर्किये के पहले से ही असहज द्विपक्षीय रिश्तों को और खराब कर देगा। 

अजरबेजान ने भी किया पाकिस्तान का समर्थन

भारत की तरफ से ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत के बाद तुर्किये के अलावा, अजरबेजान ने पाकिस्तान का पूरा समर्थन किया है। कहने की जरूरत नहीं कि अजरबेजान और भारत के द्विपक्षीय रिश्ते भी रसालत में जाएंगे। भारत की कोशिश तुर्किये और अजरबेजान के पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों को और मजबूत बनाने की होगी। 

ऑपरेशन सिंदूर के तहत की जा रही कार्रवाई की जानकारी देने के लिए आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कर्नल सोफिया कुरैशी ने बताया, ‘पाकिस्तान की तरफ से बड़े पैमाने पर की गईं हवाई घुसपैठों पर कार्रवाई के बाद ड्रोन के मलबे की फोरेंसिक जांच की जा रही है। प्रारंभिक रिपो‌र्ट्स से पता चलता है कि वे तुर्किये के असीसगार्ड सोंगर ड्रोन हैं।’

असीसगार्ड सोंगर ड्रोन

बाद में सूत्रों ने बताया कि असीसगार्ड सोंगर ड्रोन का पहली बार व्यापक तौर पर किसी दूसरे देश के विरुद्ध इस्तेमाल किया गया है। तुर्किये की सेना में भी इसे वर्ष 2020 में ही शामिल किया गया है। यह बताता है कि न सिर्फ इसकी आपूर्ति पाकिस्तान को की जा रही है, बल्कि तुर्किये ने संभवत: पाकिस्तान को इसकी टेक्नोलोजी ट्रांसफर भी की है। 

इस घटना से साफ है कि भविष्य में भारत को न सिर्फ पाकिस्तान को दी जा रही चीन की रक्षा प्रौद्योगिकी से सचेत रहना है, बल्कि तुर्किये के रक्षा उपकरणों पर भी नजर रखनी होगी।सूत्रों का कहना है कि पहलगाम हमले के कुछ ही घंटे बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने तुर्किये के राष्ट्रपति तैयप एर्दोगन से टेलीफोन पर बात की थी। 

पाक के हवाई अड्डों पर उतरे तुर्किये के जहाज

इसके बाद पाकिस्तान के हवाई अड्डों पर तुर्किये सेना के हवाई जहाजों को माल उतारते देखा गया, जबकि कराची बंदरगाह पर तुर्किये नौसेना का एक जहाज भी पहुंचा है। पाकिस्तान और तुर्किये सेना की तरफ से आधिकारिक तौर पर बताया गया है कि उनके बीच सैन्य आपूर्ति हो रही है। 

शरीफ और एर्दोगन के बीच दोबारा भी बात हुई है जिसमें तुर्किये ने ऑपरेशन सिंदूर की भ‌र्त्सना की और भारत पर आरोप लगाया कि वह निर्दोष नागरिकों पर हमला कर रहा है। तुर्किये ने यह भी कहा कि वह पाकिस्तान के साथ है। एर्दोगन ने हाल ही में यह संकेत देने की कोशिश की थी कि भारत विरोध की नीति बदल रहे हैं। 

भारत के साथ रिश्तों को तुर्किये ने किया दरकिनार

जैसा कि सितंबर, 2024 में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कश्मीर का जिक्र नहीं किया था, लेकिन अब साफ है कि तुर्किये भारत के साथ पारंपरिक मजबूत रिश्तों को दरकिनार कर पाकिस्तान को सैन्य मदद पहुंचा रहा है। 

असलियत में पाकिस्तान, तुर्किये और अजरबेजान के बीच एक त्रिपक्षीय गठबंधन बनने का संकेत पहले से ही मिल रहा था। तुर्किये और अजरबेजान कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन करते हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद अजरबेजान ने पाकिस्तान को पूरा समर्थन देने की घोषणा की है। 

भारत ने हाल के वर्षों में तुर्किये और अजरेबजान के धुर विरोधी पड़ोसी देश ग्रीस और अर्मेनिया के साथ द्विपक्षीय संबंधों को धार देने की शुरुआत भी कर दी है। 

फरवरी, 2024 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ग्रीस की यात्रा की थी, जिस पर तुर्किये की भृकुटियां तनी हुई थीं। इसी तरह से अर्मेनिया को भारत कई तरह के रक्षा उपकरणों की आपूर्ति करने लगा है।

Red Max Media
Author: Red Max Media

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