
ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को शुक्रवार को देश की शीर्ष अदालत से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने कई ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को जारी 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के जीएसटी नोटिस पर रोक लगा दी है। यह नोटिस जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) ने जारी किया था। याचिका के अंतिम निपटारे तक सभी कारण बताओ नोटिस पर अगली कार्यवाही पर रोक रहेगी।
2023 में जारी किया गया था नोटिस
केंद्र सरकार ने 1 अक्टूबर 2023 में जीएसटी कानून में संशोधन किया था। इसके तहत विदेशी ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के लिए भारत में पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया था। अक्टूबर 2023 में ही जीएसटी विभाग ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। इन कंपनियों पर कर चोरी का आरोप लगा।
28 फीसदी जीएसटी का विरोध
अगस्त 2023 में जीएसटी परिषद ने साफ किया कि ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर जितने रुपये का दांव लगाया जाएगा, उस पूरी रकम पर 28 फीसदी जीएसटी वसूला जाएगा। जीएसटी परिषद के इस फैसले के खिलाफ गेमिंग कंपनियों ने विभिन्न हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
इसके बाद केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने नौ हाईकोर्ट से 28 फीसद जीएसटी को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को अपने पास ट्रांसफर कर लिया। शुक्रवार को इन्हीं याचिकाओं पर सुनवाई हुई।
सभी कार्यवाही पर रोक का आदेश
अदालत में जीएसटी विभाग का पक्ष अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमन ने रखा। उन्होंने कहा कि कुछ कारण बताओ नोटिस फरवरी में समाप्त हो जाएंगे। पीठ ने कहा कि इन मामलों में सुनवाई की आवश्यकता है। यह भी कहा कि गेमिंग कंपनियों के खिलाफ सभी कार्यवाही पर रोक लगाई जानी चाहिए।
अदलत में गेम्स 24×7, हेड डिजिटल वर्क्स, फेडरेशन ऑफ इंडियन फैंटेसी स्पोर्ट्स जैसी कई ऑनलाइन गेमिंग फर्मों ने याचिका दाखिल की थी। 2023 में जीएसटी खुफिया महानिदेशालय ने गेमिंग कंपनियों को 71 नोटिस भेजे। इसमें उन पर 2022-23 के दौरान और 2023-24 के पहले सात महीनों में ब्याज और दंड को छोड़कर 1.12 लाख करोड़ रुपये के जीएसटी की चोरी का आरोप लगाया गया।








