
मौनी अमावस्या पर लगभग पांच लाख श्रद्धालुओं ने काशी पुराधिपति बाबा विश्वनाथ का दर्शन किया। यह संख्या तब रही जब महाकुंभ में हादसे के बाद काशी आ रहे बहुत से श्रद्धालुओं के वाहनों को काशी की सीमा से दूर रास्ते में जगह-जगहर रोक दिया गया था। जनवरी के 29 दिनों में अब तक 93 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा का दर्शन कर चुके हैं।
हालांकि महाकुंभ में हादसे के बाद चैतन्य प्रशासन की रणनीति से श्रद्धालुओं के जनज्वार में वह धक्कामुक्की जैसा प्रबल प्रवाह बुधवार को नहीं दिखा जो बीते तीन दिनों से काशी की सड़कों पर दृष्टिगोचर हो रहा था। प्रशासन ने गलियों से सड़कों तक यातायात व भीड़ प्रबंधन के उपाय किए।
कैंट स्टेशन पर देर रात उमड़े श्रद्धालु, बैरिकेडिंग से रोके गए यात्री
कैंट स्टेशन पर बुधवार की रात अचानक बढ़ी श्रदालुओं की भीड़ से स्थानीय प्रशासन के हाथ पांव फूल गए। रेलवे परिसर में दबाव कम करने के लिए सभी प्रवेश द्वारों को बंद कर दिया। यात्री आश्रय के द्वारा और दूसरे गेट को बंद कराकर वहां सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए। सिर्फ गेट संख्या एक से यात्रियों को प्रवेश दिया गया।
श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के गेट नंबर चार के पास श्रद्धालुओं की भीड़।
श्रद्धालु वाराणसी कैंट पहुंचे तो यहां मुश्किल खड़ी हो गई। क्यों कि कैंट रेलवे स्टेशन के दोनों होल्डिंग एरिया पहले से ही फुल हैं। पुलिस और रेल अधिकारियों के पहुंचने पर धीरे-धीरे यात्रियों को रेलवे स्टेशन पर एंट्री दी गई। रणनीति बनी कि यात्रियों को उनके गंतव्य स्थान पर ट्रेनों से रवाना किया जाएगा।








