ईरान के साथ परमाणु शांति समझौते की पेशकश

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प

ईरान के साथ की परमाणु शांति समझौते की पेशकश, चेतवानी देने से भी नहीं चूके ट्रंप;

अमेरिका चाहता है कि ईरान किसी भी हाल में परमाणु संपन्न देश ना बनने पाए। अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे लेकर ईरान के सामने समझौता करने की पेशकश की है। इतना ही नहीं ट्रंप ने ईरान को चेतावनी भी दे डाली है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ परमाणु शांति समझौता करने की पेशकश की है लेकिन साथ ही यह चेतावनी भी दी कि अगर ईरान नहीं मानता है, तो यह उसके लिए घातक साबित होगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। आदेश के तहत अमेरिकी ट्रेजरी विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह ईरान पर सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाए। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया था कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना उनकी पहली प्राथमिकता है।

ईरान से संबंधित शासकीय आदेश पर हस्ताक्षर करने के दौरान ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा, “मैं ईरान से यह कहना चाहता हूं कि मैं एक बड़ा समझौता करना चाहता हूं। एक ऐसा समझौता जिससे वो अपनी जिंदगी आगे बढ़ा सकें।” ट्रंप ने साफ कहा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं रख सकता, अगर ऐसा होता है तो यह उसके लिए बहुत दुर्भाग्यशाली साबित होगा।

ट्रंप के पहले कार्यकाल में क्या हुआ

बता दें कि, मई 2018 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने ईरान के साथ परमाणु समझौते को एकतरफा बताते हुए इससे अमेरिका को हटा लिया था। समझौते से बाहर होते ही ट्रंप ने ईरान पर अपनी दबाव की रणनीति तेज कर दी थी जिसमें कई मांगें शामिल थीं। इन मांगों में से अधिकतर परमाणु समझौते से संबंधित ही नहीं थी लेकिन इनका संबंध ईरान की क्षेत्रीय गतिविधियों से जरूर था। ट्रंप ने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर रोक लगाने की मांग की थी।

जो बाइडेन प्रशासन ने किए थे प्रयास

जो बाइडेन प्रशासन ने ईरान के साथ परमाणु डील को फिर से बहाल करने की कोशिश की थी लेकिन ईरान ने डील में वापसी के लिए शर्तें लगा दीं। ईरान ने कहा था कि अमेरिका पहले यह स्वीकार करे कि समझौते से उसका हटना अनुचित था, उस पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाए और यह गारंटी दे कि भविष्य में कभी अमेरिका एकतरफा तरीके से समझौते से नहीं हटेगा। ईरान की इन शर्तों पर अमेरिका राजी नहीं हुआ था जिस कारण दोनों देशों के बीच समझौता बहाल नहीं हो पाया था।

विशेष जानकारी

गौर करने वाली बात यह है कि पिछले चार सालों में ईरान ने अपने परमाणु संवर्धन को काफी हद तक उन्नत किया है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने इस बारे में चौंकाने वाली बातें कही थीं। दिसंबर 2024 की IAEA की एक अन्य रिपोर्ट में संकेत दिया गया था कि ईरान 60 प्रतिशत अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम बनाने की आड़ में हथियार-ग्रेड यूरेनियम बनाने की क्षमता स्थापित कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया था कि ईरान संभवतः अपने मौजूदा स्टॉक का उपयोग किए बिना भी हथियार-ग्रेड यूरेनियम का उत्पादन कर सकता है,यह खतरे वाली बात है।

 

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Author: Red Max Media

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