
पीएम मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने करीब 7000 करोड़ रुपये के उन्नत टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस) के अधिग्रहण को मंजूरी दी है। एटीएजीएस पहली स्वदेशी रूप से डिजाइन विकसित और निर्मित 155 मिमी की तोप है। यह अत्याधुनिक तकनीक और बेहतर मारक क्षमता से लैस है। तोप में 52 कैलिबर की लंबी बैरल लगी है।
अत्याधुनिक तकनीक से लैस हैं तोपें
2013 में शुरू हुआ था ATAGS प्रोजेक्ट
लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम तोपों की श्रेणी को होवित्जर कहा जाता है। ATAGS 40 किमी तक मार करने कर सकती है। बड़े कैलिबर की वजह से यह तोप दूर तक मार करने में सक्षम है। ATAGS प्रोजेक्ट की शुरुआत 2013 में किया गया था। इसका उद्देश्य सेना की पूरी तोपों को आधुनिक आर्टिलरी गनों में तब्दील करना था। ATAGS को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है और निजी कंपनियों के सहयोग से इसका निर्माण किया जाएगा।
विदेश पर निर्भरता होगी कम
आर्टिलरी गन में इस्तेमाल 65 फीसदी से अधिक पार्ट्स को घरेलू स्तर पर तैयार किया गया है। इनमें बैरल, ब्रीच मैकेनिज्म, फायरिंग, रिकॉइल सिस्टम और गोला-बारूद हैंडलिंग मैकेनिज्म शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट से न केवल भारत के रक्षा उद्योग को मजबूत मिलेगी बल्कि विदेश पर निर्भरता भी कम होगी। ATAGS भारतीय सेना में पुरानी 105 मिमी और 130 मिमी की तोपों की जगह लेंगी। इससे सेना का तोपखाना आधुनिक होगा।








