
दुनिया भर में एआई का विस्तार काफी बढ़ रहा है। इस बीच माइक्रोसॉफ्ट के को- फाउंडर बिल गेट्स की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि एआई के आने के बाद भी कई ऐसे सेक्टर हैं जहां पर एआई का खास असर देखने को नहीं मिलेगा। बिल गेट्स का मानना है कि एनर्जी बायोलॉजी और कोडिंग जैसे सेक्टर में कोडिंग में मानवीय भूमिका काफी महत्वपूर्ण हैं।
क्या है बिल गेट्स का मानना?
न्यू यॉर्क पोस्ट के अनुसार एनबीसी के द टुनाइट शो पर दिए एक साक्षात्कार में माइक्रोसॉफ्ट के को- फाउंडर बिल गेट्स ने एआई की बढ़ती डिमांड और इसको लेकर चिंताओं पर बात की। इसमें उन्होंने हर क्षेत्र में एआई की बढ़ती भूमिका को लेकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि एआई के आने से चिकित्सा और शिक्षा जैसे कई पारंपरिक कामों में मानवता की भूमिका काफी कम हो जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले 10 सालों में यह बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
इन क्षेत्रों के लोगों पर नहीं पड़ेगा ज्यादा प्रभाव
माइक्रोसॉफ्ट के को- फाउंडर बिल गेट्स का मानना है कि बायोलॉजी के क्षेत्र में एआई इंसानों की जगह लेने में सफल नहीं हो पाएगा। उन्होंने बताया कि बीमारियों की पहचान, डीएनए एनालिसिस और नई दवाओं के विकास के लिए मानवीय विशेषज्ञता की आवश्यकता हमेशा से पड़ी है। इस क्षेत्र में एआई केवल सहायक उपकरण के रूप में प्रयोग किया जा सकेगा।
एनर्जी सेक्टर
वहीं, बिल गेट्स का मानना है कि एनर्जी सेक्टर और जलवायु परिवर्तन जैसे जुड़े समाधान बेहद कठिन है। बिल गेट्स की मानें तो यहां पर एआई की कुछ सीमाएं हैं, जिसके भीतर ही वह काम कर सकता है। इस क्षेत्र में विशेषज्ञों की आवश्यकता हमेशा से रही है और आगे भी रहेगी। इन क्षेत्रों में एआई का खास प्रभाव देखने की संभावनाएं काफी कम हैं।
इतना ही नहीं उन्होंने बताया कि कोडिंग में भी एआई इंसानों को पीछे नहीं छोड़ पाएगा। बिल गेट्स का मानना है कि कोडिंग में मानवीय भूमिका काफी महत्वपूर्ण हैं। एआई लिख तो सकता है, लेकिन जटिल सॉफ्टवेयर डिजाइन, इनोवेशन और प्रॉब्लम सॉल्विंग के लिए मानव प्रोगरार्म की आवश्यकता होगी।








