
भारत में कुपोषण से लड़ने के लिए पोषण अभियान 2018 में शुरू हुआ जिसे 2022 में मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 नाम दिया गया। 2021 में पेश पोषण ट्रैकर ऐप ने डिजिटल तकनीक का उपयोग करके सेवाओं को मजबूत किया। अब तक 10 करोड़ लोग आईसीडीएस योजना से जुड़े हैं। 7वें पोषण पखवाड़े में जागरूकता बढ़ाने और लाभार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा।
डिजिटल तकनीक से मजबूत हुआ पोषण अभियान
भारत में डिजिटल तकनीक का तेजी से विस्तार हो रहा है और सरकारी योजनाओं में इसका इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। इसी दिशा में 2021 में ‘पोषण ट्रैकर’ नामक एक डिजिटल ऐप लॉन्च किया गया, जिसने मैनुअल रिपोर्टिंग की जगह रियल टाइम निगरानी, रिपोर्टिंग और योजना निर्माण को आसान बनाया। यह ऐप आंगनवाड़ी केंद्रों को देश के डिजिटल इकोसिस्टम का हिस्सा बनाता है।
आंगनवाड़ी सेवाओं तक पहुंच अब और आसान
पोषण ट्रैकर ऐप को समय-समय पर अपडेट किया जाता रहा है। हाल ही में इसमें ‘लाभार्थी मॉड्यूल’ नामक एक नया इंटरफेस जोड़ा गया है, जिससे नागरिक खुद को नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र में पंजीकृत कर सकते हैं। इस सुविधा का लाभ उन लोगों को मिलेगा, जो किसी कारणवश आंगनवाड़ी कार्यकर्ता तक नहीं पहुँच पाते थे।लखनऊ की गर्भवती महिला रोली वर्मा ने इस ऐप के जरिए पंजीकरण किया और बताया, “आंगनवाड़ी दीदी ने मेरा पंजीकरण स्वीकार कर लिया। अब मैं केंद्र की सभी सेवाओं का लाभ उठा सकती हूं।”
7वें पोषण पखवाड़े में जागरूकता पर रहेगा जोर
पोषण ट्रैकर के सार्वजनिक डैशबोर्ड के अनुसार, अब तक आईसीडीएस (ICDS) योजना के तहत लगभग 10 करोड़ लाभार्थियों ने पंजीकरण कराया है। इसके अलावा, 25 लाख से अधिक लोगों ने इस ऐप को डाउनलोड किया है और करीब 40,000 नागरिकों ने इस ऐप या वेब इंटरफेस के जरिए पंजीकरण किया है।
8 अप्रैल 2025 से शुरू होने वाले 7वें राष्ट्रीय पोषण पखवाड़े के दौरान, इस ऐप के प्रति जागरूकता बढ़ाने और कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने पर खास ध्यान दिया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक आंगनवाड़ी सेवाएं पहुंचाई जा सकें।








