आदिवासी संस्कृति और परंपरा का होगा दस्तावेजीकरण

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दस राज्यों में आदिवासी संस्कृति और परंपरा का होगा दस्तावेजीकरण (सांकेतिक तस्वीर)

पीएम मोदी भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर कहा था कि आदिवासी संस्कृति का दस्तावेजीकरण आवश्यक है। उस पर पहल पंचायतीराज मंत्रालय ने की और झारखंड सरकार के साथ मिलकर हमारी परंपरा हमारी विरासत अभियान शुरू किया गया। इसकी निगरानी के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित कर चुका पंचायतीराज मंत्रालय अब अन्य नौ पेसा अधिसूचित राज्यों में भी आदिवासियों की संस्कृति और परंपराओं का दस्तावेजीकरण कराने जा रहा है।

आदिवासी समुदाय का अपना लोक शासन, लोककला और संस्कृति है, लेकिन विडंबना है कि इस विरासत और परंपरा को जैसे-तैसे आदिवासी जन लोककथाओं और लोकलाओं के सहारे बचाए हुए हैं, क्योंकि अब तक किसी भी सरकार ने इसके दस्तावेजीकरण के लिए सोचा ही नहीं। 

‘हमारी परंपरा, हमारी विरासत’ अभियान शुरू
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर 15 नवंबर, 2024 को जब रांची गए तो आव्हान किया कि आदिवासी संस्कृति का दस्तावेजीकरण आवश्यक है। उस पर पहल पंचायतीराज मंत्रालय ने की और झारखंड सरकार के साथ मिलकर ‘हमारी परंपरा, हमारी विरासत’ अभियान शुरू किया गया। इसकी निगरानी के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित कर चुका पंचायतीराज मंत्रालय अब अन्य नौ पेसा अधिसूचित राज्यों में भी आदिवासियों की संस्कृति और परंपराओं का दस्तावेजीकरण कराने जा रहा है।
पंचायतीराज मंत्रालय और झारखंड सरकार मिलकर कर रहे काम
पंचायतीराज मंत्रालय और झारखंड पंचायतीराज विभाग ने संयुक्त रूप से 26 जनवरी, 2025 को ‘हमारी परंपरा, हमारी विरासत’ अभियान शुरू किया। मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि इस कार्य के लिए राज्य सरकार द्वारा लगाई गई टीम के साथ विभिन्न अनुसूचित जनजाति समुदायों की पारंपरिक शासन व्यवस्था के अभिन्न अंग, सांस्कृतिक विरासत, लोकगीत, त्योहारों और पूजा-प्रथाओं को साझा किया जा रहा है।
संकलित दस्तावेजों को डिजिटल रूप में भी सहेजा जाएगा

यथासंभव साक्ष्यों, फोटो, वीडियो आदि के माध्यम से उनका दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। उद्देश्य झारखंड के 20,300 गांवों के जीवंत इतिहास और सांस्कृतिक प्रथाओं का दस्तावेजीकरण करना है। पंचायतीराज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज के प्रयासों से शुरू हुए इस अभियान की निगरानी के लिए मंत्रालय में उच्चस्तरीय समिति का भी गठन किया गया है।

बताया गया है कि 15 अगस्त को इस अभियान की शुरुआत छत्तीसगढ़ में होगी। उसके बाद पेसा अधिसूचित राज्य आंध्र प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और तेलंगाना में भी शुरू होगा। इन सभी दस राज्यों से संकलित दस्तावेजों को डिजिटल रूप में भी सहेजा जाएगा।

मोदी सरकार के प्रयास से होगा दस्तावेजीकरण

उल्लेखनीय है कि पेसा अधिनियम, 1996 भी अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को आदिवासी रीति-रिवाजों, परंपराओं और स्वशासन की रक्षा करने का अधिकार देता है। यह दीगर बात है कि पेसा अधिनियम को लागू करने को लेकर भी अधिकतर राज्य अब जाकर मोदी सरकार के प्रयास से सक्रिय हुए हैं। दशकों तक रही इस उपेक्षा की पीड़ा झारखंड के खूंटी जिला निवासी मुंडा समुदाय के प्रधान महादेव मुंडा के शब्दों में छलकती है।

हमारा कोई धर्मग्रंथ नहीं- आदिवासी नेता

वह कहते हैं कि हमारा कोई धर्मग्रंथ नहीं है। इतिहास भी सिर्फ लोककलाओं और लोक कथाओं तक सीमित है। यहूदियों और मुगलों के बाद अंग्रेजों ने हमारी संस्कृति को नष्ट करने का प्रयास किया। अंग्रेजों ने इतिहास लिखा तो उसमें परंपराओं को शामिल नहीं किया। अब मोदी सरकार ने जिस तरह विरासत के दस्तावेजीकरण की पहल की है, उससे कुछ आस जरूर बंधी है।

दिल्ली आए आदिवासी प्रतिनिधि, साझा किए अनुभव

हमारी परंपरा, हमारी विरासत अभियान के तहत एक राष्ट्रीय कार्यक्रम शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इसमें केंद्रीय पंचायतीराज राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ, सचिव विवेक भारद्वाज और झारखंड पंचायतीराज विभाग की निदेशक नेशा ओरांव ने अपने विचार रखे। झारखंड के 560 से अधिक आदिवासी प्रतिनिधियों की मौजूदगी में अलग-अलग तकनीकी सत्रों में मुंडा, मांझी परगना महल, ओरांव, हो और खड़िया समुदाय के नेताओं ने विरासत के दस्तावेजीकरण के महत्व और अनुभवों को साझा किया।

Red Max Media
Author: Red Max Media

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