
गोरखपुर में वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो और वन विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए वन्यजीवों के अंगों की तस्करी का पर्दाफाश किया। पादरी बाजार गीता प्रेस और मेडिकल कॉलेज मार्ग पर तीन दुकानों से गोह सियार और सूअर के अंग बरामद हुए जिसके बाद तीन दुकानदार गिरफ्तार किए गए। बरामद अंगों को जांच के लिए भेजा गया है और तस्करों की तलाश जारी है।
इसके बाद जंगल तिलकोनिया के रेंज अखिलेश तिवारी ने टीम के साथ पादरी बाजार स्थित वैष्णो सामग्री विक्रेता के दुकानदार कन्हैया लाल के दुकान पर छापेमारी कर गोह के पांच हत्था जोड़ी बरामद किए गए हैं। इसके बाद नवदीप गुप्ता की दुकान माता शीतला ट्रेडर्स घनश्याम पंसारी, झुंगिया बाजार के दुकान से गोह के 43 पीस हत्था जोड़ी बरामद किए गए।
ग्राहक बन पहुंची टीम
पांच और दुकानदार निशाने पर
गिरफ्तार दुकानदारों के अनुसार शहर के कई और दुकानों पर वन्यजीवों का अंग बेचा जा रहा है। टीम उन दुकानों पर सोमवार की देर शाम पहुंची भी थी लेकिन वह बंद मिले। वन विभाग का कहना है कि पांच और दुकानों की जांच चल रही है। जहां पर वन्यजीवों के अंग बेजे जा रहे है। इसके अलावा इनके यहां पहुंचाने वाले तस्करों को भी ढूढा जा रहा है।
डब्लूआइआइ देहरादून में होगी अंगों की जांच
विकास यादव ने बताया कि जानवरों के अंगों की जांच वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया,(डब्ल्यूआइआइ) को बुधवार को भेजा जाएगा। जांच के बाद सही जानकारी आ सकेगी कि और कौन-कौन से जानवरों के अंग तस्कर बेच रहे थे। इसकी रिपोर्ट एक सप्ताह से लेकर 10 दिनों के बीच आएगी। बरामद अंगों की जांच में अब तक जंगली गोह, सियार, सूअर और बाघ के अंग होने की जानकारी हुई है। इसके अलावा और भी अंग है लेकिन किस जानवर के है, जांच रिपोर्ट आने के बाद पुष्ट होगा।
नेपाल, बिहार के है तस्कर, तंत्रमंत्र में होता है प्रयोग
वन विभाग की पूछताछ में दुकानदारों ने बताया कि उनके पास बंजारे, आदिवासी और घुमंतु प्रजाती के लोग पहुंचाते है। ये ज्यादातर बिहार, नेपाल, बलरामपुर, बहराइच समेत अन्य जिलों से आते है। पूजा-पाठ की दुकानों पर इसका सौदा होता है। तंत्रमंत्र और कर्मकांडों में इन जानवरों के नाखून, दांत और बाल का प्रयोग किया जाता है। वहीं गोह के अंग का प्रयोग उत्तेजक दवा बनाने में किया जाता है। ये तस्कर देवरिया, महराजगंज और कुशीनगर में भी जाते है।
तराई क्षेत्र आ सकते हैं जानवरों के अंग
वन विभाग को आशंका है कि जानवरों के अंग तराई क्षेत्र दुधवा, कर्तिनायाघाट, पीलीभीत, सोहगीबरवा, जैसे जगहों से आ सकते हैं। टीम अब इस जांच में जुटी हुई है कि आखिर बंजारे किस जगह के हैं और वह जानवरों का शिकार खुद कर रहे है या तस्करों से उनका संपर्क है या फिर स्थानीय ग्रामीणों का सहयोग ले रहे है। टीम इसकी जांच कर रही है और बंजारों की तलाश में जुटी है।








