
रूस और उत्तर कोरिया ने अपने संबंधों को और गति देते हुए बड़ा फैसला किया है। दोनों देश 10 हजार किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने वाली रेल सेवा शुरू करने जा रहे हैं। ट्रेन 10 हजार किलोमीटर की यात्रा 8 दिन में पूरा करेगी।
रूस और उत्तर कोरिया के बीच संबंध नए स्तर तक पहुंच रहे हैं। दोनों देशों के बीच अब एक बार फिर 10 हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबी दूरी की ट्रेन यात्रा शुरू होने वाली है। खास बात यह है कि यह रेल यात्रा सैलानियों को शानदार अनुभव देगी। ट्रेन खूबसूरत घाटियों, बर्फीली वादियों , नदियों और पहाड़ों को पार करते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचेगी। इस पूरी ट्रेन जर्नी के दौरान यात्री यूराल पर्वत और बैकाल झील जैसे प्राकृतिक आश्चर्यों को भी देख सकेंगे।
यात्रियों को मिलेगा अनोखा अनुभव
इस पूरी यात्रा के दौरान यात्री समय और स्थान के बदलाव का अनोखा अनुभव ले सकेंगे। ऐसा इस वजह से होगा क्योंकि पूरी यात्रा के दौरान ट्रेन आठ टाइम जोन को पार करेगी। रोमांच से भर देने वाली यह ट्रेन जर्नी रूस की राजधानी मॉस्को और उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग के बीच शुरू होगी। इस बीच यह भी जान लें कि इस ट्रेन यात्रा को कोरोना के दौरान बंद कर दिया गया था।
उत्तर कोरिया ने की है रूस की मदद
रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग में उत्तर कोरिया ने रूस की हर तरह से मदद की है। ऐसे में अब दोनों देशों के बीच ट्रेन सेवा को फिर शुरू करने का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। रूस अब उत्तर कोरिया को अपना अहम साझीदार मानता है। यही वजह से है कि दोनों देश पांच साल के लंबे अंतराल के इस ट्रेन यात्रा को फिर से शुरू कर रहे हैं। इस ट्रेन सेवा ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक और सैन्य सहयोग को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

मजबूत होगी सप्लाई लाइन
रूस और उत्तर कोरिया के बीच रेल सेवा फिर से शुरू होने के बाद दोनों देशों के संबंध और अधिक मजबूत होंगे। यह रेल रूट रूस और उत्तर कोरिया के बीच सैन्य हथियारों, गोला-बारूद और अन्य सामग्रियों की आपूर्ति को आसान और तेज बनाएगा। रेल सेवा इस सप्लाई लाइन को और मजबूत करेगी इससे यूक्रेन खिलाफ जंग में रूस की जरूरतें पूरी होंगी।
बढ़ेगा आर्थिक सहयोग
गौर करने वाली बात यह भी है कि, रूस और उत्तर कोरिया दोनों ही देश प्रतिबंधों की मार झेल रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच शुरू होने वाली रेल सेवा प्रतिबंधों को दरकिनार कर आर्थिक सहयोग को बढ़ाने में भी मददगार साबित होगी। रेल मार्ग के जरिए व्यापार और संसाधनों का आदान-प्रदान आसान होगा जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को लाभ होगा।
सामरिक लिहाज से अहम है रेल रूट
रूस और उत्तर कोरिया के बीच यह रेल सेवा पूर्वोत्तर एशिया में सामरिक स्थिति को मजबूत करती है। अमेरिका और दक्षिण कोरिया के गठबंधन को देखते हुए यह रेल सेवा रूस और उत्तर कोरिया के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगी। हगाल ही में उत्तर कोरियाई विदेश मंत्री चोई सोन-हुई ने तो यहां तक कह दिया था कि यह साझेदारी पश्चिमी प्रभाव को संतुलित करने का प्रयास है।

जानें अहम बातें
रूसी रेलवे ने कहा कि उसने उत्तर कोरिया के रेल मंत्रालय के साथ 17 जून से दोनों राजधानियों के बीच महीने में 2 बार सेवा बहाल करने पर सहमति व्यक्त की है। 10 हजार किलोमीटर की इस रेल यात्रा को पूरा करने में 8 दिन का समय लगता है। ये दुनिया की सबसे लंबी सीधी रेल यात्रा है। 17 जून को ट्रेन प्योंगयांग से रवाना होगी जो 25 जून को मॉस्को पहुंचेगी। वापसी की यात्रा 26 जून को रूसी राजधानी से शुरू होगी और 4 जुलाई को प्योंगयांग पहुंचेगी। यह यात्रा महीने में 2 बार संचालित होगी। ट्रेन 86 शहरों और 142 छोटे-बड़े स्टेशनों से गुजरेगी। इस रेल यात्रा से रूस के ग्रामीण और शहरी जीवन की झलक देखने को मिलेगी। साइबेरिया से होकर गुजरने की वजह से इस रूट को ट्रांस साइबेरियन रेलवे मार्ग कहते हैं।








