
हरियाणा सरकार वाराणसी की तर्ज पर कचरे से कोयला बनाने की परियोजना शुरू करने की तैयारी में है। शहरी निकाय मंत्री विपुल गोयल ने वाराणसी में प्लांट का दौरा किया। इस परियोजना का उद्देश्य राज्य में कूड़ा निस्तारण की समस्या का समाधान करना प्रदूषण कम करना और स्वच्छता को बढ़ावा देना है। शुरुआत में गुरुग्राम और फरीदाबाद में ऐसे प्लांट लगाए जाएंगे।
हरियाणा सरकार की कूड़े से कोयला बनाने की परियोजना सिरे चढ़ी तो राज्य में कूड़ा निस्तारण की समस्या का काफी हद तक समाधान हो सकेगा, साथ ही प्रदूषण की समस्या से निजात मिलेगी और प्रदेश स्वच्छता की ओर बढ़ेगा।
हरियाणा के 88 शहरों में हर रोज करीब 10 हजार टन कूड़ा निकलता है, जिसमें से सिर्फ 50 प्रतिशत ही प्रोसेस हो पाता है। शहरों में निकलने वाले 9700 टन कूड़े में से 7200 टन कूड़ा एकत्र करने में सफलता मिलती है, जबकि इसमें से 4800 टन कूड़ा उपचारिता हो पाता है। करीब 2300 टन कूड़ा डंप करना पड़ता है, जो कि समस्या की असली जड़ है।
इस तरह से करता है वाराणसी का कोयला प्लांट
वाराणसी के रमन इलाके में राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (एनटीपीसी) की तरफ से नियुक्त की गई संस्था मेकाबर बीके कूड़े से कोयला बनाने के प्लांट को संचालित कर रही है। फिलहाल यह देश का इकलौता कचरे से कोयला बनाने का प्लांट है, जो कि आने वाले समय में कोयले की चिंता को तो दूर करेगा ही, साथ ही हरित कोयले के रूप में प्रदूषण रहित कोयले का उत्पादन कर कीर्तिमान रच रहा है।
इस प्लांट में वाराणसी से निकलने वाला 600 टन कूड़ा प्रतिदिन निस्तारित हो रहा है। इस प्रोजेक्ट से एनटीपीसी तैयार कोयले का इस्तेमाल अपने ही कार्यों में कर बिजली उत्पादन कर रही है। अब इसका कामर्शियल इस्तेमाल किया जाने लगा है। लगभग दो घंटे की प्रक्रिया के बाद कूड़ा पूरी तरह से पाउडर की शक्ल में तैयार होता है।
इसके बाद ठंडा कर ब्रिकेटिंग यानी पाउडर को कोयले की छोटी छोटी ब्रिक (ईट) में तब्दील किया जाता है। इसके बाद इस कोयले को फिर से एक प्रोसेस से गुजारकर पूरी तरह सुखाया जाता है, ताकि जलने में दिक्कत न करे। इस कोयले को हरित कोयले के रूप में जाना जा रहा है, जो पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त होगा।
मैंने और हमारी टीम ने वाराणसी स्थित एनटीपीसी के हरित कोयला प्लांट का दौरा किया। हरियाणा में भी हम ऐसी ही परियोजना लागू करने के लिए एमओयू के क्रियान्वयन की दिशा में कार्य को गति प्रदान कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत-स्वच्छ ऊर्जा के संकल्प को साकार करते हुए मुख्यमंत्री नायब सैनी व केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में हम फरीदाबाद व गुरुग्राम में कचरे से कोयला बनाने के प्लांट लगाने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। वाराणसी की यह परियोजना बहुत ही बढ़िया और कूड़ा निस्तारण के साथ स्वच्छ पर्यावरण की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण व उपयोगी है। इन परियोजनाओं के माध्यम से शहरों को कचरा मुक्त बनाने, कचरे के पहाड़ों का निस्तारण कर भूमि का बढ़िया इस्तेमाल करने एवं स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन जैसे तीन महत्वपूर्ण कार्य हो सकेंगे। आरंभ में हम हरियाणा के दो बड़े शहरों को स्वच्छ और ऊर्जा सक्षम शहरी माडल बनाने की दिशा में काम करेंगे।
– विपुल गोयल, शहरी निकाय मंत्री, हरियाणा








