
परीक्षा पास करने के बावजूद JPSC ने एसटी उम्मीदवार को नहीं दी नौकरी, हाईकोर्ट ने लगाया 1 लाख का जुर्माना
एसटी उम्मीदवार ने जेपीएससी की परीक्षा पास की थी। हालांकि, इंटरव्यू के दौरान उसे बताया गया कि उसके फीस के पैसे आयोग को नहीं मिले हैं। ऐसे में उसे नौकरी नहीं दी जा सकती।
झारखंड राज्य लोक सेवा आयोग पर हाईकोर्ट ने एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है और पीड़ित को चार सप्ताह के अंदर नौकरी देने का आदेश दिया है। पीड़ित ने सहायक प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति के लिए परीक्षा पास की थी, लेकिन बाद में फीस न मिलने की बात कहकर उसे नियुक्ति नहीं दी गई। पीड़ित ने इस मामले में याचिका दायर की थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट की एकल पीठ ने आयोग से दोबारा विचार करने के लिए कहा था।
आयोग के अधिकारी एकल पीठ के फैसले से सहमत नहीं थे और उन्होंने खंडपीठ के सामने एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी थी। अब खंडपीठ ने आयोग को साफ तौर पर एक लाख का जुर्माना भरने और पीड़ित को चार सप्ताह के अंदर नौकरी देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही अभ्यर्थी के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया गया।
क्या है मामला?
मनोज कुमार कच्छप ने उच्च न्यायालय की एकल पीठ के समक्ष याचिका दायर कर कहा था कि वह अभ्यर्थी है और उसने 2018 में सहायक प्रोफेसर के पद के लिए आवेदन किया था। कच्छप को एसटी (अनुसूचित जनजाति) अभ्यर्थी के रूप में स्वीकार कर लिया गया और आयोग द्वारा उसके दस्तावेजों की जांच के बाद वह परीक्षा में शामिल हुआ। हालांकि, साक्षात्कार के समय उसे पता चला कि परीक्षा के लिए जमा की गई फीस आयोग के खाते में जमा नहीं हुई है, इसलिए उसकी उम्मीदवारी पर विचार नहीं किया जा सकता।
खंडपीठ ने खारिज की आयोग की याचिका
याचिका के अनुसार कच्छप ने अदालत को बताया कि आयोग में उसके द्वारा फीस के रूप में जमा की गई राशि उसके खाते में कभी वापस नहीं की गई। याचिका में कहा गया है कि साक्षात्कार से पहले आयोग ने उसे यह नहीं बताया कि उसके द्वारा जमा की गई राशि उसके खाते में जमा नहीं हुई है। उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने पहले याचिका को स्वीकार कर लिया था और आयोग को उनकी उम्मीदवारी पर विचार करने का निर्देश दिया था। आयोग ने एकल पीठ के फैसले को चुनौती दी थी, जिसे खंडपीठ ने खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश एम एस रामचंद्र राव की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पिछले आदेश को बरकरार रखा और आयोग पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जिसे आठ सप्ताह के भीतर कच्छप को देना होगा।








