
बिहार में महिलाओं की स्थिति में बदलाव देखने को मिल रहा है। दरअसल यहां साल 2018 से लेकर अब तक 1 लाख 29 हजार महिलाओं ने ड्राइविंग लाइसेंस हासिल किए हैं।
बिहार में इन दिनों बदलाव देखने को मिल रहा है। महिलाएं अब न केवल घर की चौखट या चूल्हें चौके तक सीमित हैं, बल्कि अब महिलाएं सड़कों पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। दरअसल साल 2018 से अब तक 1 लाख 29 हजार से अधिक महिलाओं ने मोटर वाहन ड्राइविंग लाइसेंस हासिल किया है। यह केवल आंकड़ों का परिवर्तन नहीं है, बल्कि सामाजिक सोच का भी परिवर्तन है। महिलाएं अब आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। बदलाव के इस केंद्र में सबसे आगे है पटना। यहां 40 हजार से अधिक महिलाओं ने ड्राइविंग लाइसेंस हासिल किए हैं। वहीं दूसरे स्थान पर है तिरहुत प्रमंडल, जहां 33 हजार महिलाओं को लाइसेंस मिला है। इसके अलावा दरभंगा, मगध और मुंगेर क्रमश: तीसरे, चौथे और पांचवे स्थान पर हैं।
बिहार में महिलाओं की स्थिति पहले से काफी बेहतर
बता दें कि पटना से दूर कोसी प्रमंडल में भी ऐसा ही बदलाव देखने को मिल रहा है। यहां बदलाव की रफ्तार थोड़ी धीमी है। हालांकि यहां करीब 4 हजार महिलाओं ने अपना ड्राइविंग लाइसेंस बनवा लिया है। बता दें कि पहले बिहार के जिन क्षेत्रों में पुरुषों का एकाधिकार था, अब वहां महिलाएं भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। अगर पुलिस विभाग की बात करें तो यहां यहां 23 फीसदी महिलाएं, जिनमें से 13 फीसदी महिलाएं अधिकारी और 27 फीसदी महिलाएं कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात हैं। बता दें कि बिहार में महिलाओं की भागीदारी सभी राज्यों के मुकाबले काफी बेहतर है, फिर चाहे वो सरकारी नौकरियों में हो या परिवहन के क्षेत्र में।
क्या बोले परिवहन सचिव
बदलते बिहार की तस्वीर की कहानी बयां करते हुए परिवहन सचिव संदीप कुमार आर. पुडकलकट्टी ने कहा, “पहले महिलाएं बच्चों को स्कूल छोड़ने-लाने, ऑफिस जाने और बाजार जाने जैसे जरूरी कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर रहती थीं। लेकिन अब स्थिति बदल रही है। महिलाएं न केवल ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त कर रही हैं, बल्कि आत्मविश्वास के साथ वाहन भी चला रही हैं। यह आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है।”








