
जापान ने अपने क्षेत्र में पहली बार मिसाइल का परीक्षण किया है। जापानी सेना ने इस बारे में जानकारी दी है। जापान, चीन के आक्रामक रुख को देखते हुए जवाबी हमला करने की क्षमता हासिल करने के लिए अपनी सैन्य तैयारियों को बढ़ा रहा है।
जापान ने बड़ा कदम उठाते हुए कुछ ऐसा किया है जो उसने पहले नहीं किया था। जापान ने अपने क्षेत्र में पहली बार मिसाइल परीक्षण किया है। जापान की सेना ने मिसाइल परीक्षण के परिणामों की जांच कर रही है। जापान ने मिसाइल परीक्षण इस वजह से किया है ताकि वह चीनी प्रतिरोध के खिलाफ जवाबी हमला करने की क्षमता हासिल कर सके। चीन से खतरे को देखते हुए हाल के वर्षों में जापान ने अपनी सैन्य तैयारियों को भी बढ़ाया है।
जापान के उत्तरी मुख्य द्वीप होक्काइडो के ‘शिजुनाई एंटी-एयर फायरिंग रेंज’ में ‘टाइप-88’ मिसाइल का परीक्षण किया गया, जो सतह से जहाज पर मार करने वाली कम दूरी की मिसाइल है। अधिकारियों ने बताया कि ‘ग्राउंड सेल्फ डिफेंस फोर्स’ की पहली ‘आर्टिलरी ब्रिगेड’ के अभ्यास में लगभग 300 सैनिक शामिल हुए, जिन्होंने होक्काइडो के दक्षिणी तट से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित जहाज पर प्रशिक्षण मिसाइल से निशाना साधा। इस जहाज में कोई मौजूद नहीं था। उन्होंने बताया कि अधिकारी अभी परीक्षण के परिणामों की जांच कर रहे हैं।
जानें जापान ने इससे पहले कहां किए हैं परीक्षण
स्थान की कमी और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण जापान ने इससे पहले भी सहयोगी अमेरिका और शीर्ष रक्षा साझेदार ऑस्ट्रेलिया के क्षेत्रों में मिसाइल परीक्षण किए हैं क्योंकि यहां प्रशिक्षण के लिए बड़े-बड़े मैदान उपलब्ध हैं। जापान के क्षेत्र में मंगलवार को किया गया पहला मिसाइल परीक्षण क्षेत्रीय समुद्र में चीन की बढ़ती आक्रामक नौसैनिक गतिविधियों को रोकने वाला कदम बताया जा रहा है। जापान ने इस मिसाइल टेस्ट के जरिए अपनी आत्मनिर्भर सैन्य क्षमता को भी दर्शाया है।

जापान कर क्या रहा है?
जापान, चीन और रूस के बीच जापानी तटों के आसपास बढ़ते संयुक्त सैन्य अभ्यासों से भी चिंतित है। जापान इस वर्ष के अंत में ‘टॉमहॉक’ सहित लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों को तैनात करने की योजना भी बना रहा है। उसने अमेरिका से ‘टॉमहॉक’ मिसाइल खरीदी है। जापान टाइप 12 सतह से जहाज तक मार करने वाली मिसाइलें भी बढ़ा रहा है, जिनकी मारक क्षमता लगभग 1,000 किलोमीटर है जो टाइप 88 से 10 गुना अधिक है।








