
बिहार विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर को समाप्त हो रहा है। ऐसे में अब चुनाव की तारीखों का ऐलान जल्द किया जा सकता है। चुनाव आयोग ने 4 महीने का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। जानें डिटेल्स…
आयोग ने कहा कि यह प्रक्रिया 25 जून से शुरू होगी। उसने कहा कि मतदाता सूची का मसौदा 1 अगस्त को प्रकाशित किया जाएगा और अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर को प्रकाशित की जाएगी।
‘अक्टूबर में हो सकती है चुनाव के तारीखों की घोषणा’
चुनाव आयोग की इस टाइमलाइन से संकेत मिलता है कि बिहार विधानसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा अक्टूबर के पहले सप्ताह में की जा सकती है। बिहार विधानसभा चुनाव नवंबर में होंगे क्योंकि 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर को समाप्त हो रहा है। सूत्रों की मानें तो चुनाव कार्यक्रम की घोषणा आमतौर पर मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के एक सप्ताह के भीतर कर दी जाती है। इसका मतलब यह है कि बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान अक्टूबर के पहले सप्ताह में हो सकता है।
चुनाव आयोग ने 4 महीने का कार्यक्रम घोषित किया:
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कैलेंडर के अनुसार:
25 जून से 26 जुलाई 2025 तक: बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने या संशोधित करने से संबंधित आवेदन निर्धारित प्रपत्रों में स्वीकार करेंगे।
27 जुलाई से 31 जुलाई तक: प्राप्त फार्मों के आधार पर मतदाता सूची को अद्यतन किया जाएगा।
1 अगस्त 2025: इसी आधार पर मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशित किया जाएगा।
1 अगस्त से 1 सितम्बर 2025 तक: ड्राफ्ट मतदाता सूची के आधार पर दावे एवं आपत्तियां ली जाएंगी।
25 सितम्बर तक: दावे और आपत्तियों का निपटारा निर्वाचन रजिस्ट्रार अधिकारियों द्वारा किया जाएगा या उन्हें पूरा किया जाएगा।
30 सितंबर, 2025: दावे और आपत्तियों का निपटारा करने के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
एक भी वोटर छूटना नहीं चाहिए
यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है कि कोई भी पात्र नागरिक न छूटे तथा कोई भी अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो। साथ ही, मतदाता सूची में मतदाताओं के नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता भी लाई जा रही है। बता दें कि बिहार के लिए अंतिम गहन पुनरीक्षण आयोग द्वारा 2003 में किया गया था।
वर्तमान में तेज़ी से हो रहा शहरीकरण, लगातार होने वाला प्रवासन, नए युवाओं का 18 वर्ष की आयु पूरी कर मतदाता बनने की पात्रता प्राप्त करना, मृत्यु की जानकारी का समय पर न मिलना तथा अवैध विदेशी नागरिकों के नाम सूची में दर्ज हो जाना जैसी स्थितियों के कारण यह गहन पुनरीक्षण आवश्यक हो गया है ताकि त्रुटिरहित और विश्वसनीय मतदाता सूची तैयार की जा सके।








