
पीएम मोदी के मास्को से आने के बाद रूस की सेना में 91 भारतीयों के शामिल होने की सूचना मिली थी और इसमें से 15 स्वदेश वापस आ गये हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि रूस के अधिकारियों का कहना है कि ये भारतीय एक संविदा के तहत रूस की सेना में शामिल हुए हैं हम इस तर्क को नहीं स्वीकार करते।
जुलाई 2024 में अपनी मास्को यात्रा के दौरान पीएम नरेन्द्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन से कहा था कि उनकी सेना में जिन भारतीयों को रखा गया है उनकी जल्द से जल्द रिहाई होनी चाहिए। पुतिन ने इसका वादा किया था कि ऐसा किया जाएगा। लेकिन दो महीनों से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद तकरीबन छह दर्जन भारतीयों की वापसी संभव नहीं हो पा रही। इसकी एक बड़ी वजह रूस के रक्षा मंत्रालय की तरफ से इन भारतीयों की सेवाओं को लेकर किये गये समझौते को रद्द नहीं किया जाना बताया जा रहा है।
भारत के अलावा नेपाल-श्रीलंका के लोग भी शामिल
इस मामले की जानकारी रखने वाले कूटनीतिक सूत्रों ने बताया है कि रूस का रक्षा मंत्रालय सिर्फ भारतीयों के लिए समझौतों को रद्द करने का नोटिस नहीं जारी कर सकता। यूक्रेन के साथ युद्ध की शुरुआत के बाद रूस की सेना में भारत के अलावा नेपाल, श्रीलंका व दूसरे अन्य देशों के लोगों को भी शामिल किया गया है। ऐसे में वहां का रक्षा मंत्रालय सिर्फ एक देश के लिए विशेष आदेश नहीं पारित करना चाहता।








