रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए ब्रिक्स सम्मेलन का हिस्सा बनेंगे। वहीं, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे। ऐसे में भारत के पास अपना प्रभाव बढ़ाने का मौका है।
ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। बाद में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को भी इसमें शामिल कर इसका विस्तार किया गया। भारत, चीन और रूस इस समूह में शामिल सबसे प्रभावी देश हैं और जब रूस और चीन के सबसे बड़े नेता प्रत्यक्ष रूप से इसमें शामिल नहीं हो रहे हैं तो भारत के पास अपना प्रभाव छोड़ने का मौका है।
पीएम मोदी सबसे बड़े नेता
इस सम्मेलन में शामिल हो रहे नेताओं में पीएम मोदी का कद सबसे बड़ा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस सम्मेलन में वर्चुअली जुड़ेंगे, क्योंकि यूक्रेन के साथ युद्ध के चलते वह वार क्रिमिनल हैं और अगर वह ब्राजील आते तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता। इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने पुतिन को गिरफ्तार करने का आदेश दिया है और ब्राजील भी इसका सदस्य है। इसी वजह से वह वर्चुअली इसमें जुड़ेंगे। वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग फिलहाल घरेलू अर्थव्यवस्था पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। इस वजह से वह इस बैठक में शामिल नहीं हो रहे। चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग इस सम्मेलन का हिस्सा होंगे। ऐसे में साफ है कि पीएम मोदी को सबसे लोकप्रिय और कद्दावर नेता होने का लाभ मिलेगा। उन्हें इस सम्मेलन में मुख्य मंच मिलने की संभावना है।
भारत को कैसे मिल सकता है कूटनीतिक लाभ
पीएम मोदी सिर्फ ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने के लिए ब्राजील नहीं गए हैं। वह ब्राजील के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। भारत और ब्राजील के संबंध 77 साल पुराने हैं। भारत के बाद ब्राजील को जी20 समिट की मेजबानी मिली है। वहीं, अगला ब्रिक्स सम्मेलन भारत में होना है। ब्रिक्स सम्मेलन में व्यापार से लेकर रक्षा तक कई अहम मुद्दों पर चर्चा होना तय है। हर मोर्चे पर भारत के पास अपनी बात ज्यादा प्रभावी तरीके से रखने का मौका होगा। इसका फायदा भारत को मिल सकता है।








