बिहार में जनसुराज की सरकार बनी तो मिनटों में हटाएंगे शराबबंदी

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प्रशांत किशोर का मानना है कि शराबबंदी का कोई सामाजिक फायदा नहीं है, बल्कि इससे युवाओं का भविष्य खराब हो रहा है और वे शराब माफिया के हाथों का खिलौना बनते जा रहे हैं. उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जब से शराबबंदी लागू हुई है तब से 8.5 लाख मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें 1.25 लाख लोग जेल जा चुके हैं.

जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार की शराबबंदी को लेकर बड़ा दिया है. प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर जनसुराज की सरकार आती है, तो शराबबंदी को मिनटों में हटा दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि शराबबंदी से बिहार को हर साल 20 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है. जो शराब माफिया, भ्रष्ट अधिकारी और नेताओं की जेब में जा रहा है.

प्रशांत किशोर का मानना है कि शराबबंदी का कोई सामाजिक फायदा नहीं है, बल्कि इससे युवाओं का भविष्य खराब हो रहा है और वे शराब माफिया के हाथों का खिलौना बनते जा रहे हैं. उनके मुताबिक, शराबबंदी से गरीब और वंचित समाज सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है और इस निर्णय को वापस लेना आवश्यक है ताकि लोगों की संपत्ति की लूट और युवाओं का नुकसान रोका जा सके.

आंकड़ों का दिया हवाला

उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जब से शराबबंदी लागू हुई है तब से 8.5 लाख मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें 1.25 लाख लोग जेल जा चुके हैं. इनमें से अधिकतर गरीब और पिछड़े वर्ग से आते हैं, प्रशांत किशोर ने कहा शराबबंदी हटाने से अगर महिला का वोट नहीं भी मिलते, तो भी इसे हटाना जरूरी है. क्योंकि यह समाज के हित में नहीं है, हमारा उद्देश्य युवाओं को माफियाओं के चंगुल से बचाना और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है.

बिहार में शराबबंदी

बिहार में 1 अप्रैल 2016 से शराबबंदी है और इस शराबबंदी को महिलाओं का खूब समर्थन मिला है. 2009 में छपरा के सिताबदिरा से शुरू हुए शराबबंदी आंदोलन ने बिहार में देखते-देखते बड़ा रूप ले लिया. आखिर महिलाओं की मांग पर नीतीश सरकार ने 1 अप्रैल 2016 में बिहार में शराबबंदी कर दी. जिसके बाद से बिहार में ये बंदी लागू है. शराबबंदी से शराब का काला बाजार भी प्रदेश में खूब फला-फूला है.

जहरीली शराब से होने वाली मौतों, लाखों मुकदमें, महिला आंदोलनों और गिरफ्तारियों की वजह से नीतीश सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ गया था, जिसके बाद उन्होंने शराबबंदी लागू की. शराबबंदी का बिहार की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है, जिसके बाद उनके इस फैसले कई हल्कों में विरोध भी किया जा रहा है

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Author: Red Max Media

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