
बिहार में अपराधियों की पौ बारह है। उन्हें न पुलिस का भय है और न नीतीश कुमार का इकबाल ही अब ऐसा दिखता है, जिससे उनमें भय पैदा हो। अर्से बाद नवादा की एक महादलित बस्ती की घटना ने नीतीश कुमार की चिंता इसलिए भी बढ़ा दी होगी कि आरजेडी नेता तेजस्वी यादव लगातार अपराध के मुद्दे पर नीतीश को घेरने में लगे हैं।
बिहार के नवादा में बेलछी की पुनरावृत्ति होने से बची। वैसे दलित समाज के 80 घरों को आग के हवाले कर दिया गया। जले-अधजले घरों के जहां-तहां बिखरे सामान घटना की भयावहता की गवाही दे रहे हैं। बेलछी की तरह किसी दलित की जान तो नहीं गई, लेकिन आग लगने से लोग उधर ही उलझे न होते तो मार-काट भी मचने से कोई रोक नहीं सकता। बेलछी की घटना 1977 में हुई। वह नक्सली आतंक का दौर था। उसके बाद नब्बे का दशक तो अपराध और अपराधियों के नाम ही रहा। बेकाबू अपराध को देख कर ही तब पटना हाईकोर्ट ने बिहार में जंगल राज की बात कही थी, जो अब तक बिहार की सियासत में गूंजती रहती है। सुशासन की सरकार का दावा करने वाले बिहार के सीएम नीतीश कुमार तेजस्वी की भाषा में लाचार और बेबस हो गए हैं।
नवादा नीतीश के चेहरे पर दाग
नवादा में बताया जाता है कि महादलित टोले में दबंगों ने 80 घर फूंक दिए। हालांकि प्रशासन सिर्फ 21 घरों की बात कहता है। इस मामले में पुलिस ने 15 लोगों को गिरफ्तार किया है और गोली-पिस्टल बरामद किए हैं। आगजनी में क्या-क्या नुकसान हुआ है, इसका आकलन एसआईटी करेगी। एसआईटी बना दी गई है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने एक जाति विशेष के लोगों को इस घटना का जिम्मेदार ठहराया है। असलियत क्या है, यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा, लेकिन नीतीश कुमार के राज में इस तरह की घटना उन पर काला धब्बा है। नीतीश दावा करते हैं कि क्राइम, करप्शन और कम्युनलिज्म से कोई समझौता नहीं करते हैं। बाकी की बातें करना तो इस वक्त अप्रासंगिक होगा, लेकिन क्राइम ने बिहार को झकझोर दिया है, इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता।
तेजस्वी ने क्राइम को बनाया मुद्दा
आरजेडी नेता और बिहार के पूर्व डेप्युटी सीएम तेजस्वी यादव ने हाल के दिनों में बिहार का क्राइम बुलेटिन जारी करना शुरू किया है। इसके पीछे उनकी मंशा बिहार की हालत बताने से ज्यादा आरजेडी शासन को जंगल राज कहने वालों को जवाब देना है। भाजपा और उसके दलों के नेता अक्सर जंगल राज की याद दिला कर लोगों को आरजेडी से सचेत रहने की लोगों को सलाह देते हैं। वे इसी का भय दिखा कर आरजेडी को काबू में रखने की कोशिश करते रहे हैं। उन्हें कामयाबी भी मिलती रही है। सच भी है कि शायद ही कोई दिन ऐसा बीतता है, जिस दिन हत्या, लूट, रेप जैसे गंभीर अपराध न होते हों। तेजस्वी अब अब उसी अंदाज में नीतीश कुमार की सरकार पर हमलावर हैं, जिस तर्ज पर एनडीए नेता लालू-राबड़ी के शासन को जंगलराज कहते नहीं थकते।
नीतीश कुमार लाचार हो गए हैं!
बिहार के सीएम नीतीश कुमार अपराधियों पर नकेल कसने की जितनी भी जुगत करते हैं, समस्या उतनी ही विकराल होती जा रही है। नीतीश ने क्राइम कंट्रोल के लिए तेज तर्रार आईपीएस अधिकारी आरएस भट्टी को बिहार का डीजीपी बनाया। पूर्व में उनकी कार्यशैली को जिन्होंने देखा था, उन्हें पूरा भरोसा था कि अब जरूर अपराधियों में खौफ पैदा होगा। आश्चर्य कि वे भी क्राइम कंट्रोल में नाकाम रहे। अब तो उन्होंने बिहार ही छोड़ दिया है। काम्या मिश्रा भी पुलिस की सख्त अधिकारी मानी जाती थीं। उन्होंने भी बिहार में अपराधियों से हार मान ली और इस्तीफा द दिया। अब शिवदीप लांडे ने भी इस्तीफा दे दिया है। पुलिस के इतने जांबाज अफसर अगर अपराधियों पर नकेल नहीं कर पाए तो यह नीतीश सरकार की नाकामी ही कही जाएगी। तेजस्वी इसी मुद्दे को जोर-शोर से उठा रहे हैं।
“दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा”, नवादा अग्निकांड को चिराग पासवान ने बताया शर्मनाक
बिहार के नवादा की घटना पर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री चिराग पासवान की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने मकानों को जलाए जाने की घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मामले की जांच कर रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। चिराग ने कहा कि यह दुखद घटना है। यह निंदनीय और शर्मनाक है। मैं राज्य सरकार के साथ संपर्क में हूं। सबसे पहले तो यह सुनिश्चित करना होगा कि पीड़ितों का पुनर्वास हो और घायलों का इलाज हो।








