तिरुपति मंदिर प्रसाद में सामने आए एनिमल टैलो, लार्ड और फिश ऑयल

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तिरुपति मंदिर के प्रसाद में गड़बड़ी की बात सामने आने के बाद देशभर में आक्रोश नजर आ रहा है। इस बीच कुछ शब्दों की चर्चा काफी हो रही है, जिनका नाम एनिमल टैलो, लार्ड और फिश ऑयल है। आखिर इन शब्दों का मतलब क्या है?

देशभर में तिरुपति मंदिर के प्रसाद में मिलावट का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले के सामने आने के बाद श्रद्धालुओं में काफी गुस्सा है और राजनीतिक बयानबाजी भी हो रही है। दरअसल आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने दावा किया था कि प्रतिष्ठित श्री वेंकटेश्वर मंदिर में ‘प्रसादम’ के रूप में दिए जाने वाले लड्डू को तैयार करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मुख्य सामग्री में पशु वसा और मछली का तेल होता है।

उन्होंने आरोप लगाया था जब उनके पूर्ववर्ती जगन मोहन रेड्डी मुख्यमंत्री थे तो ‘प्रसादम’ बनाने के लिए घी के बजाय जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल किया जाता था। नायडू की पार्टी टीडीपी ने अपने दावों के समर्थन में सबूत के तौर पर एनडीडीबी सीएएलएफ (पशुधन और खाद्य में विश्लेषण और अध्ययन केंद्र) नामक प्रयोगशाला की एक रिपोर्ट पेश की और लड्डुओं में बीफ टैलो, लार्ड, मछली के तेल और पाम तेल के उपयोग का आरोप लगाया।

बता दें कि एनिमल टैलो का मतलब पशु में मौजूद फैट से होता है। वहीं लार्ड का मतलब जानवरों की चर्बी से होता है।

एनिमल टैलो क्या है?

एनिमल के वसायुक्त ऊतक को हटाकर, उबालकर और स्पष्ट करके टैलो बनाया जाता है। एनिमल टैलो का उपयोग आम तौर पर उच्च तापमान पर खाना पकाने जैसे डीप फ्राइंग और रोस्टिंग के लिए किया जाता है। इसका उपयोग साबुन, मोमबत्तियों और सीजनिंग कच्चे लोहे के बर्तनों के उत्पादन में भी किया जाता है।

एनिमल टोलो मुख्य रूप से संतृप्त वसा (सैचुरेटेड फैट) से बना होता है, जैसे कि मक्खन और नारियल तेल जैसे अन्य ठोस खाना पकाने वाले वसा होते हैं। यह कमरे के तापमान पर नरम मक्खन की बनावट के समान होता है। तरल वसा (लिक्विड फैट) जैसे जैतून का तेल, मूंगफली का तेल और कैनोला तेल मुख्य रूप से असंतृप्त वसा (अनसैचुरेटेड फैट)  हैं।

लार्ड क्या होता है?

एक समय बेकिंग के लिए अनिवार्य रूप से इस्तेमाल में लाए जाने वाले लार्ड की जगह अब ज्यादातर रसोई में वनस्पति तेल इस्तेमाल होता है। लार्ड एक अर्ध-ठोस सफेद वसा उत्पाद है जो सुअर के वसायुक्त ऊतक को रैंडर करके प्राप्त किया जाता है। यह उन समुदायों में प्रमुख भोजन रहा है जो सुअर का मांस खाते हैं। एक समय में यह बेकिंग में जरूरी होता था, अब अधिकांश रसोई में इसकी जगह वनस्पति तेलों ने ले ली है।

नॉनवेज कैटेगरी में दोनों सामग्रियां मानव उपभोग के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं लेकिन ‘प्रसादम’ बनाने के लिए उनके उपयोग ने विवाद को जन्म दिया है। लड्डू की अन्य मुख्य सामग्री में चना बेसन, चीनी, छोटे चीनी के टुकड़े, काजू, इलायची, कपूर और किशमिश है।

क्या है फिश ऑयल?

फिश ऑयल या मछली के तेल को मछली के ऊतकों यानी टिश्यूज से निकाला जाता है। इसका इस्तेमाल ओमेगा 3, फैटी एसिड के साथ कई पोषक तत्वों की वजह से किया जाता है। दिल को स्वस्थ रखने के लिए इस तेल का इस्तेमाल करने वालों की संख्या काफी ज्यादा है। लेकिन लड्डू में इसका इस्तेमाल हैरान करने वाला है।

कैसे बनता है तिरुपति मंदिर में लड्डू?

लड्डू एक विशेष रसोई में एक विशेष वर्ग द्वारा तैयार किए जाते हैं जो सदियों से यह काम करता आ रहा है। यह मंदिर 300 वर्षों से भी अधिक समय से भक्तों को प्रसाद के रूप में लड्डू प्रदान कर रहा है। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि प्रतिदिन लड्डू तैयार करने में लगभग 400-500 किलोग्राम घी, 750 किलोग्राम काजू, 500 किलोग्राम किशमिश और 200 किलोग्राम इलायची का उपयोग किया जाता है।

Red Max Media
Author: Red Max Media

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