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नितीश कुमार और जे पी नड्डा
बिहार में विधानसभा के चुनाव अगले साल होना है, पर माहौल चुनावी बनता दिख रहा है। तीन सप्ताह के अंदर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा दूसरी बार बिहार आ रहे हैं। जेडीयू ने अक्तूबर के अगले सप्ताह में कार्यकारिणी की बठक बुलाई है। तेजस्वी यादव की यात्रा का पहला चरण पूरा हो गया है। आरएलएम के उपेंद्र कुशवाहा ‘बिहार यात्रा’ पर 25 सितंबर से ही निकल चुके हैं। जुबानी तीर भी खूब चल रहे हैं।

सितंबर के आखिरी सप्ताह के बचे दिन और अक्तूबर का पहला सप्ताह बिहार की राजनीति के लिए बड़े घटनाक्रम वाले साबित हो सकते हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा एक दिन के दौरे पर 28 सितंबर को बिहार आ रहे हैं। उसके एक दिन पहले यानी 27 सितंबर से जेडीयू का जिलावार कार्यकर्ता सम्मेलन प्रस्तावित है।

पांच अक्तूबर को जेडीयू कार्यकारिणी की बैठक होने वाली है। हाल ही में तेजस्वी यादव ने आभार यात्रा का एक चरण पूरा किया है। यानी बिहार में राजनीतिक गतिविधियां जोर पकड़ने लगी हैं। इन गतिविधियों का फलाफल क्या होने वाला है, इसी पर विचार करते हैं।

जेपी नड्डा 28 को बिहार दौरे पर

जेपी नड्डा इसी महीने बिहार आए थे। महज तीन सप्ताह के भीतर उनका दूसरा बिहार दौरा है। आधिकारिक तौर पर उनके कार्यक्रम के बारे में यही बताया गया है कि संगठन के काम से वे बिहार आ रहे हैं। भाजपा का राष्ट्रव्यापी सदस्यता अभियान चल रहा है। बड़ा राज्य होने के बावजूद सबसे कम सदस्य बिहार में बने हैं।

नड्डा के दौरे को लेकर कयास तो कई तरह के लग रहे हैं, लेकिन ज्यादा संभावना यही है कि सदस्यता अभियान जोर नहीं पकड़ पाने के कारण जानने और उसे गति प्रदान करने के टिप्स और टास्क के साथ नड्डा इतने कम अंतराल में बिहार आ रहे हों।

नड्डा के दौरे को लेकर कयासबाजी

जेपी नड्डा जिन भी वजहों से बिहार इतनी जल्दी आ रहे हों, पर उनके दौरे को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ लोग मान रहे कि नीतीश कुमार की भाजपा के प्रदेश स्तरीय नेताओं से पटरी नहीं बैठ रही है। कुछ कह रहे कि भाजपा में अंदरूनी गुटबाजी के मद्देनजर नड्डा आ रहे हैं।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कुछ कार्यक्रमों या समीक्षा बैठकों में भाजपा कोटे के मंत्रियों के शामिल न होने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। इसे नीतीश कुमार की नाराजडगी से जोड़ कर देखा ही जा रहा है।

पिछली बार सात सितंबर को दो दिनी दौरे पर बिहार आए जेपी नड्डा ने दो हजार करोड़ से अधिक की स्वास्थ्य परियोजनाओं की सौगात बिहार को दी थी। एक कार्यक्रम में तो सीएम नीतीश कुमार ने भी भागीदारी की थी। नड्डा ने दो दिनों में नीतीश से दो बार मुलाकात भी की थी। तब भी कहा गया था कि नीतीश कुमार नाराज हैं और उन्हें मनाने के लिए ही नड्डा ने उनसे मुलाकात की थी।

क्या सच में नाराज हैं नीतीश कुमार

सवाल उठता है कि क्या सच में नीतीश कुमार नाराज हैं। नीतीश ने कभी भाजपा के खिलाफ बयानबाजी नहीं की। दो दिन पहले ही उन्होंने भाजपा के संस्थापकों में शुमार पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती राजकीय समारोह के तौर पर मनाई। पीएम नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे की उपलब्धियों पर उन्होंने उन्हें बधाई दी।

भाजपा के खिलाफ उनके मुंह से अभी तक ऐसा कुछ नहीं निकला है, जिससे उनकी नाराजगी की झलक मिलती हो। इसलिए यह बात बेमानी लगती है कि वे भाजपा से खफा हैं। इसलिए सच यही लगता है कि नड्डा वाकई बिहार में सदस्यता अभियान की समीक्षा करने ही आ रहे हैं।

भाजपा को इस बात पर आश्चर्य है कि बिहार में सदस्यता अभियान गति क्यों नहीं पकड़ पा रहा। असम जैसे राज्य में सदस्यता अभियान ने कमाल कर दिया है तो बहार में ऐसा क्यों नहीं हो रहा।

जेडीयू के दो-दो कार्यक्रम शुरू हो रहे

जेडीयू का जिलावार कार्यकर्ता सम्मेलन 27 सितंबर से शुरू लहो रहा है। पहला आयोजन 27-28 को मुजफ्फरपुर में होना है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव मनीष वर्मा ने इसकी कमान संभाली है। हफ्ते भर के अंदर जेडीयू का सकार्यकारिणी की बैठक है। आमतौर पर पार्टी कार्यकारिणी की बैठक तभी होती है, जब कोई बड़ा फैसला लेना होता है।

लोकसभा चुनाव के पहले बैठक हुई तो ललन सिंह की जगह नीतीश कुमार खुद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार भी बैठक में कोई महत्वपूर्ण निर्णय होगा। जेडीयू के संगठन में जिस तरह हाल के दिनों में कई बदलाव हुए हैं, उससे लगता है कि प्रदेश अध्यक्ष को भी इस बार बदला जा सकता है।

अशोक चौधरी के कविता प्रकरण को छोड़ भी दें तो उनकी कई गतिविधियां ऐसी रही हैं, जिनसे नीतीश सहज तो नहीं ही होंगे। उनके बारे में भी कोई निर्णय पार्टी ले सकती है। हालांकि ये महज अनुमान हैं। कार्यकारिणी बैठक का एजेंडा अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है।

Red Max Media
Author: Red Max Media

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