बिहार में क्यों है चुनाव जैसी चहल पहल ?

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नितीश कुमार
बिहार में समय से पहले विधानसभा चुनाव की चर्चा लोकसभा चुनाव के वक्त से ही चल रही है। हालांकि प्रशासनिक तौर पर अभी तक इसके संकेत नहीं मिल रहे। राजनीतिक दलों की बढ़ी सक्रियता से अनुमान लगाया जा रहा है कि बिहार में इस बार समय से पहले चुनाव हो सकता है।

विधानसभा के चुनाव महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में हो रहे हैं, लेकिन चुनावी सरगर्मी बिहार में दिख रही है। हर दल इस तरह एक्टिव है, जैसे आमतौर पर चुनाव के दौरान होता है। यह सब तब हो रहा है, जब बिहार विधानसभा के चुनाव में अभी साल भर की देरी है। यही नहीं, हर साल की तरह इस बार भी आधा बिहार बाढ़ की विभीषिका झेल रहा है।

JDU का कार्यकर्ता समागम

दूसरे दल अगर चुनाव की आहट का अनुमान लगा कर ऐसा कर रहे हों तो आश्चर्य नहीं, लेकिन सत्ताधारी जेडीयू भी अगर सक्रिय है तो इसकी कोई न कोई वजह जरूर होगी। जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव मनीष वर्मा कार्यकर्ता समागम 27 सितंबर से शुरू कर चुके हैं। उनकी तैयारी हर जिले में जाकर कार्यकर्ताओं से संवाद करने की है। नीतीश कुमार ने मनीष वर्मा का चयन शायद इसलिए किया है कि वे पार्टी के सुलझे हुए नेताओं में शुमार किए जा रहे हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा से राजनीति में आए मनीष वर्मा को कुछ ही महीने पहले नीतीश ने राष्ट्रीय महासचिव बना कर बड़ी जिम्मेवारी सौंपी है। सियासी गलियारे में उन्हें नीतीश कुमार का उत्तराधिकारी भी लोग मानने लगे हैं।

BJP का सदस्यता अभियान

भारतीय जनता पार्टी (BJP) दूसरे तरीके से सक्रिय हुई है। पार्टी ने इसी महीने के आरंभ में सदस्यता अभियान की शुरुआत की है। वैसे यह अभियान राष्ट्रव्यापी है, लेकिन बिहार में इसकी प्रासंगिकता इसलिए बढ़ गई है कि दूसरे दल भी किसी न किसी रूप में पब्लिक कनेक्ट में लगे हुए हैं। भाजपा के नेता सदस्य बनाने के नाम पर लोगों तक पहुंच रहे हैं। हालांकि इस अभियान में भाजपा को आशातीत सफलता नहीं मिल रही है। यह पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के लिए चिंता का कारण भी बना हुआ है। यही वजह है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा तीन सप्ताह के अंतराल पर दो बार बिहार का दौरा कर चुके हैं।

तेजस्वी ने की आभार यात्रा

आरजेडी नेता और पार्टी के सीएम फेस तेजस्वी यादव ने हाल ही में आभार यात्रा निकाली थी। कई चरणों में चलने वाली उनकी आभार यात्रा का पहला चरण पूरा भी हो गया है। अपनी यात्रा के क्रम में तेजस्वी ने पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं को महागठबंधन सरकार की 17 महीने की उपलब्धियों का जिक्र तो किया ही, इस बार महागठबंधन की सरकार हर हाल में बनाने का संदेश भी कार्यकर्ताओं को दिया। कार्यकर्ताओं की बातें भी उन्होंने सुनीं और उस अनुरूप कार्ययोजना भी बनाई।

कार्यकर्ताओं से ही उन्हें सुझाव मिला कि आजेडी को भी भाजपा की तरह सदस्यता अभियान चलाना चाहिए। उसके बाद उन्होंने सदस्यता अभियान की शुरुआत कर दी। कार्यकर्ताओं से उन्हें अपने नेताओं और विधायकों के बारे में कई तरह की जानकारी मिली है। संभव है कि इस जानकारी का इस्तेमाल टिकट बंटवारे के वक्त तेजस्वी यादव करेंगे। यानी कुछ के टिकट भी कट सकते हैं।

उपेंद्र कुशवाहा भी दौरे पर

राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा भी बिहार की यात्रा पर हैं। वे अपने समर्थकों-कार्यकर्ताओं से रूबरू होकर उन्हें एनडीए को मजबूत करने का मंत्र दे रहे हैं। कुशवाहा मानते हैं कि लोकसभा चुनाव में एनडीए को उम्मीद के मुताबिक सीटें इसलिए नहीं मिलीं क्योंकि ठीक से समन्वय नहीं बन पाया। इस बार समन्वय के साथ चुनाव लड़ा जाएगा। एनडीए की सत्ता में वापसी सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि एनडीए में उनकी यात्रा पर सवाल उठ रहे हैं। जेडीयू नेता भगवान सिंह कुशवाहा का कहना है कि उन्हें अकेले यात्रा पर नहीं निकलना चाहिए था। इसके लिए पहले एनडीए में चर्चा करनी चाहिए थी।

मांझी-चिराग भी सक्रिय हैं

एनडीए के दो पार्टनर हम (HAM) के संस्थापक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी सरकारी आयोजनों के बहाने बिहार में सक्रिय हो गए हैं। लोजपा-आर के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान भी एक्टिव हैं। बेगूसराय, शेखपुरा और वैशाली में चिराग सभाएं कर चुके। एलजेपी के दूसरे धड़े के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री चिराग के चाचा पशुपति कुमार पारस भी क्षेत्र का बिहार का दौरा कर रहे हैं। वे भी एनडीए में हैं, लेकिन सभी 243 सीटों पर उनकी तैयारी चल रही है। वे कहते हैं कि लोकसभा चुनाव में उन्हें किनारे रखा गया, लेकिन इस बार वे विधानसभा चुनाव में नहीं चूकेंगे।

प्रशांत किशोर भी २ अक्टूबर को बना रहे हैं जन सुराज

जन सुराज अभियान के प्रमुख प्रशांत किशोर ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक नई राजनीतिक पार्टी के गठन की घोषणा की, जिसका नाम और नेतृत्व सहित विवरण 2 अक्टूबर को सामने लाया जाएगा।

उन्होंने कहा, “मैं कभी इसका नेता नहीं रहा और न ही कभी बनने की आकांक्षा रखता हूं। अब समय आ गया है कि लोग नेतृत्व की भूमिकाएं निभाएं।”

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब प्रशांत किशोर अपनी “जन सुराज” पहल के पहले चरण के पूरा होने की तैयारी कर रहे हैं, जो 2 अक्टूबर 2022 को शुरू हुआ था। उन्होंने खुलासा किया कि इस तारीख को जन सुराज नेतृत्व परिषद के सदस्यों और पार्टी प्रमुख के नामों का खुलासा किया जाएगा।

Red Max Media
Author: Red Max Media

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