
सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार को 48 नागरिकों की अवमानना याचिका पर नोटिस जारी किया है। याचिका में राज्य सरकार पर संरचनाओं को ध्वस्त करने के आदेश का उल्लंघन करने का आरोप है। अदालत ने अधिकारियों को अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया और 21 दिनों में जवाब दाखिल करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को असम सरकार को एक नोटिस जारी कर 48 नागरिकों की तरफ से दायर अवमानना याचिका पर जवाब मांगा। याचिका में राज्य सरकार पर संरचनाओं को ध्वस्त करने के शीर्ष अदालत के आदेश का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार के अधिकारियों को अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने का भी निर्देश दिया।
21 दिन के अंदर देना होगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीआर गवई और केवी विश्वनाथन की बेंच ने मामले की सुनवाई की। बेंच ने असम सरकार को 21 दिनों में जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए एक नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता के वकील हुजेफा अहमदी ने असम सरकार की कार्रवाई को ‘शीर्ष अदालत के आदेश का उल्लंघन करार दिया। हालांकि, पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि असम सरकार द्वारा कोई तोड़फोड़ नहीं की गई है।
सरकार पर फैसले की अनदेखी का आरोप
अदालत ने अपने निर्देशों में कहा, … अभी तक कोई तोड़फोड़ नहीं हुई है… हम नोटिस जारी करेंगे। साथ ही कहा कि अदालत की मंजूरी के बिना कोई तोड़फोड़ नहीं की जाएगी। 48 याचिकाकर्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा कि असम के अधिकारियों ने अदालत के फैसले की अनदेखी की है और उनके घरों को ध्वस्त करने के लिए चिह्नित कर दिया है।
मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का हवाला
याचिकाकर्ताओं का दावा है कि वे मूल भूमिधारकों के साथ पावर ऑफ अटॉर्नी समझौते के आधार पर दशकों से संपत्ति पर रह रहे हैं। याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया कि निवासियों को निष्पक्ष सुनवाई का अवसर दिए बिना और उन्हें उनके घरों और आजीविका से वंचित किए बिना ही तोड़फोड़ की गई। ये संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।








