
सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार से सिविक वालंटियर की भर्ती का आधार और प्रक्रिया पूछी है। कोर्ट ने कहा कि इनकी नियुक्ति स्कूल अस्पताल जैसी संवेदनशील जगहों पर नहीं होनी चाहिए। इतना ही नहीं कोर्ट ने बिना किसी सत्यापन के सिविक वालंटियरों की भर्ती पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ये असत्यापित व्यक्तियों को राजनीतिक संरक्षण देने का अच्छा तरीका है।
सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार से सिविक वालंटियर की भर्ती का आधार और प्रक्रिया पूछी है। कोर्ट ने कहा कि इनकी नियुक्ति स्कूल, अस्पताल जैसी संवेदनशील जगहों पर नहीं होनी चाहिए। इतना ही नहीं कोर्ट ने बिना किसी सत्यापन के सिविक वालंटियरों की भर्ती पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ये असत्यापित व्यक्तियों को राजनीतिक संरक्षण देने का अच्छा तरीका है।
मंगलवार को प्रधानन्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने यह निर्देश कोलकाता में डाक्टर से दरिंदगी के मामले की सुनवाई के दौरान सिविक वालंटियर का मुद्दा उठने पर दिए। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह हलफनामा दाखिल कर बताए कि किस कानूनी आधार के तहत सिविक वालंटियर की भर्ती की जाती है।
भर्ती की प्रक्रिया व इसके लिए योग्यता क्या है? क्या भर्ती से पहले सत्यापन किया जाता है व इनकी तैनाती किन संस्थानों में होती है? इन्हें दैनिक वेतन मिलता है या मासिक आधार पर भुगतान होता है। कोर्ट ने कहा कि हलफनामे में भर्ती की पूरी प्रक्रिया बताई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि ये संवेदनशील संस्थानों जैसे स्कूल और अस्पतालों में काम नहीं करें। प्रदेश सरकार यह भी बताएगी कि कितने सिविक वा¨लटियर हैं।
‘रातियर साथी योजना बंद होनी चाहिए’
कोर्ट ने ये निर्देश तब दिए जब डाक्टरों के संगठन की ओर से पेश वकील करुणा नंदी ने कहा कि बंगाल सरकार की रात्रि ड्यूटी में सुरक्षा देने वाली रातियर साथी योजना बंद होनी चाहिए क्योंकि इसमें सिविक वालंटियर शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही सलवा जूडम के फैसले में सिविक वालिंटियर को पुलिस की शक्तियां देना नामंजूर कर चुका है। राज्य में 1500 सिविक वालंटियर काम कर रहे हैं जो थाने से भी जुड़े हैं। कोलकाता में आरजी कर अस्पताल में डाक्टर से दरिंदगी का अभियुक्त सिविक वालिंटियर था और उसका अस्पताल में बेरोकटोक आना-जाना था। दिल्ली सरकार ने भी सिविक वालंटियर भर्ती किए थे, जो पुलिस को यातायात नियंत्रण व अन्य कामों में मदद करते थे।
नेशनल टास्क फोर्स को जल्दी काम करना चाहिए सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टास्क फोर्स को काम की रफ्तार बढ़ाने को कहा है। केंद्र की ओर से पेश सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में नेशनल टास्क फोर्स के काम की प्रगति रिपोर्ट पेश की जिसमें बताया गया कि एनटीए ने सभी राज्यों और हितधारकों से अस्पतालों और डाक्टरों की सुरक्षा पर सुझाव व प्रतिक्रियाएं मंगाई थीं और अभी तक उसे 1700 से ज्यादा सुझाव प्राप्त हो चुके हैं। एनटीए की नौ सितंबर के बाद कोई बैठक नहीं होने की जानकारी पर कोर्ट ने एनटीए को जल्द और तर्कसंगत समय में काम पूरा करने की बात कही। कोर्ट ने मेहता से कहा कि एनटीए को तीन सप्ताह में काम पूरा करना चाहिए। सीबीआइ ने भी डाक्टर से दरिंदगी की जांच और आरजी कर अस्पताल में वित्तीय अनियमिताओं की जांच की प्रगति रिपोर्ट पेश की। सीबीआइ ने बताया कि जांच का काम गंभीरता से हो रहा है। आरोपपत्र दाखिल कर दिया गया है और जांच जारी है।








