
अयोध्या में भव्य दीपोत्सव की तैयारी… आज से शुरू होगा दीये बिछाने का काम… इस बार 55 घाटों पर जलाए जाएंगे 25 लाख दीपक
सनातन धर्म में प्रमुख त्योहारों में से एक दीपावली का पर्व बेहद खास माना जाता है. 5 दिनों का रोशनी का ये त्योहार अपने साथ कई उमंग और खुशियां लेकर आता है. इस समय दिवाली की धूम चारो तरफ देखने को मिल रही है. बात करें भगवान राम की नगरी अयोध्या की तो यहां एक अलग ही नजारा देखने को मिलता है क्योंकि यहां हर साल देश के कोने-कोने से दीए आते हैं, जिन्हें दीपावली के दिन जलाया जाता है. ये दीए लाखों की संख्या में जलाए जाते हैं, जिनसे अयोध्या का नजारा सभी को मंत्रमुग्ध कर देता है. इस बार की दिवाली में रावण की ससुराल से आए मिट्टी के लाखों दीए जलाए जाएंगे.
रावण की ससुराल माने जाने वाले मेरठ में आजकल कुम्हार अपने ज़िलों में तो दीयों की खूब दुकानदारी कर ही रहे हैं, उन्हें अयोध्या से भी ख़ूब ऑर्डर मिल रहे हैं. अयोध्या से लाखों दीयों का ऑर्डर मेरठ के कुम्हारों को भी मिला है. कुम्हारों का कहना है कि उन्हें अयोध्या में लाखों दीए पहुंचाने हैं. कुम्हार दीपक प्रजापति का कहना है कि अब तक उनके दस लाख से ज्यादा दीए बिक चुके हैं और दो लाख से ज्यादा का ऑर्डर अकेले अयोध्या से मिल चुका है.
कई दीए तो इतनी ख़ूबसूरती से बनाए गए हैं कि आप देखते ही रह जाएंगे. कमल के आकार वाला दीया और शंख के आकार वाला दीया ख़ूब ट्रेंड कर रहा है. इन दीयों को इतनी ख़ूबसूरती से सजाया गया है कि आपको लगेगा कि ये पीतल या फिर तांबे के बने हुए हैं. बाद में मालूम होता है कि ये दीया मिट्टी का ही बना हुआ है.
कुम्हार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी तारीफ करते नज़र आते हैं कि उनके लिए सरकार ने बहुत कुछ किया, जिसकी वजह से कारोबार दिन दोगुनी रात चौगुनी तरक्की कर रहा है. कुम्हारों का ये भी कहना है कि पहले तो एक बार दीपोत्सव आता था, लेकिन अब तक दीपावली पर जो सामान उनका बच जाता है वो 22 जनवरी वाले दिन के लिए बिक जाता है. 22 जनवरी को ही अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर की भव्य प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम संपन्न हुआ था. तब से 22 जनवरी के दिन भी देश दीपोत्सव मनाता है.
अयोध्या के बारे में कुछ और बातें:
- अयोध्या को प्राचीन भारत के सात सबसे पवित्र शहरों में से एक माना जाता है.
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अयोध्या, पवित्र सरयू नदी के किनारे बसा है.
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अयोध्या, भगवान राम के अनुयायियों के लिए बहुत पवित्र स्थान है.
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अयोध्या, जैन धर्म के पांच तीर्थंकरों की जन्मस्थली है.
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अयोध्या में श्रीहरि के सात प्राकट्य हुए हैं, जिन्हें सप्तहरि के नाम से जाना जाता है








