
ब्लैक बास्ता हैकिंग ग्रुप ने दुनियाभर के लाखों कंप्यूटर यूजर्स की टेंशन बढ़ा दी है। यह हैकिंग ग्रुप कंप्यूटर यूजर्स को अपना निशाना बना रहे हैं और सिस्टम में सेंध लगा रहे हैं। 2022 से इस हैकिंग ग्रुप ने कई यूजर्स को अपना शिकार बनाया है।
ब्लैक बास्ता हैकिंग ग्रुप ने दुनियाभर के पी सी / लैपटॉप यूजर्स को सकते में डाल दिया है। साइबर अपराधियों के इस ग्रुप ने दुनियाभर के कार्पोरेट कंपनियों में इस्तेमाल किए जाने वाले माइक्रोसॉफ्ट टीम वीडियो कांफ्रेंसिंग प्लेटफॉर्म पर रेनसमवेयर अटैक की धमकी दी है। हैकिंग ग्रुप कार्पोरेट में काम करने वाले कर्मचारियों को माइक्रोसॉफ्ट हेल्प डेस्क के नाम से ई-मेल कर रहे हैं और उनके पी सी में ब्लैक बास्ता रेनसेमवेयर इंस्टॉल कर रहे हैं। यह रेनसमवेयर इतना खतरनाक है कि वो यूजर के पीसी या लैपटॉप का रिमोट एक्सेस ले लेता है।
कौन है ब्लैक बास्ता हैकिंग ग्रुप?
अमेरिका बेस्ड साइबर सिक्योरिटी कंपनी रल्यक्वेस्ट ने ब्लीपिंग कंप्यूटर के जरिए इस बात की जानकारी दी है। यह हैकिंग ग्रुप अप्रैल 2022 से एक्टिव है और रेनसमवेयर के माध्यम से दुनियाभर के कार्पोरेट्स को टारगेट कर रहा है। सिक्योरिटी रिसर्चर्स का दावा है कि ब्लैक बास्ता हैकिंग ग्रुप कोंटी साइबर क्राइम सिंडिकेट नेटवर्क का हिस्सा है, जिसे जून 2022 में बंद कर दिया गया था।
ब्लैक बास्ता कैसे करता है काम?
यह खतरनाक हैकिंग ग्रुप कार्पोरेट नेटवर्क को मुख्य तरीके से टारगेट करता है। कार्पोरेट कंपनियों के सिक्योरिटी सिस्टम में सेंध लगाने के लिए यह ग्रुप सोशल इंजीनियरिंग का सहारा लेता है, ताकि आसानी से हाई सिक्योरिटी सिस्टम को तोड़ा जा सके। पहले भी इस हैकिंग ग्रुप ने कार्पोरेट में काम करने वाले कर्मचारियों को बिना वायरस वाले ई-मेल भेजकर हेल्प डेस्क के नाम पर साइबर अटैक किया है।
यह हैकिंग ग्रुप पहले कर्मचारियों को ई-मेल भेजता है, जिसमें वायरस से बचने के लिए हेल्प डेस्क का बहाना बनाया जाता है। कर्मचारियों को जाल में फंसने के बाद हैकिंग ग्रुप उनके सिस्टम का रिमोट एक्सेस लेने के मना लेता है। कर्मचारी आईटी हेल्प डेस्क के नाम पर एनी डेस्क या फिर अन्य किसी रिमोट डेस्कटॉप टूल का एक्सेस हैकर्स को दे देते हैं। इसके बाद हैकर्स सिस्टम में एंटर करके नेटवर्क का एक्सेस ले लेते हैं।
आई टी हेल्प डेस्क के नाम पर सिस्टम में सेंध
हैकिंग ग्रुप कार्पोरेट कर्मचारियों को फोन कॉल्स के अलावाा माइक्रोसॉफ्ट टीम के जरिए कॉन्टेट करता है, ताकि कर्मचारियों को लगे कि सही में आई टी हेल्प डेस्क से कॉन्टेक्ट किया गया है। हैकर्स द्वारा इस्तेमाल किए गए ई-मेल या फिरटीम के अकाउंट का डिस्प्ले नेम आई टी हेल्प डेस्क होता है, जिसकी वजह से कर्मचारी आसानी से उनकी जाल में फंस जाते हैं।
अमेरिकी साइबर सिक्योरिटी एजेंसी का कहना है कि हैकिंग ग्रुप के लोग वन ऑन वन चैट के जरिए कर्मचारियों के सिस्टम को एक्सेस करते हैं। इस दौरान रिमोट एक्सेस लेने के बाद सिस्टम में ब्लैक बस्ता रेनसमवेयर इंस्टॉल कर दिया जाता है, जिसके जरिए कर्मचारियों की कंपनियों के नेटवर्क में आसानी से एंट्री हो जाती है। सिक्योरिटी एजेंसी ने इस तरह के आई टी वाले ई-मेल या चैटिंग रिक्वेस्ट से बचने की सलाह दी है।
कैसे बचें?
साइबर सिक्योरटी एक्सपर्ट्स की मानें तो इस तरह के आई टी हेल्प डेस्क वाले ई-मेल को इग्नोर करें और आने वाले ई-मेल का अड्रेस वेरिफाई करें।
साथ ही, अपने सिस्टम को रिमोट डेस्कटॉप एक्सेस देने से बचें और जांचने-परखने के बाद ही कोई एक्सेस दें।








