
प्रशांत किशोर बिहार की चुनावी जंग में मुख्य मुद्दों जैसे बेहतर शिक्षा, कृषि विकास, पलायन रोकथाम, शराब बंदी और भूमि सर्वे पर जोर दे रहे हैं। चुनावी संघर्ष में उन्हें विरोधाभासों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन वे जनता का समर्थन जुटाने पर केंद्रित हैं। लेकिन PK को अपने अस्त्र 5+3 पर भरोसा है।
बिहार की राजनीति में बेटा,बेटी,बहू या सीधे कह लें कि परिवारवाद की राजनीति के विरुद्ध जनसुराज के नायक प्रशांत किशोर बिहार की राजनीति में उतरे हैं। एक तरफ उनका दावा बिहार को जातीय जकड़न से छुड़ाना, क्राइम कंट्रोल कराना है। तो दूसरी तरफ जनता का पिंड उन मुद्दों से छुड़ाने का दावा है जिनका आम जिंदगी में कोई मतलब नहीं। वहीं PK साफ सुथरी छवि ,शिक्षित लोगों के जरिए बिहार को बदलने की बात करते हैं। अब ये तो चुनावी नतीजे बताएंगे कि उनकी सोच के साथ बिहार की जनता कितनी दूर तक चलती है। लेकिन उनके पास 5+3 का नया अस्त्र भी है जिसे वो जातीय राजनीति की काट मान कर चल रहे हैं।
इन मुद्दों के साथ खड़े हैं प्रशांत किशोर
बिहार की राजनीति में जिन मुद्दों की साथ प्रशांत किशोर सत्ता की दूरी तय करने चाहते हैं वह बिहार की सूरत बदल सकती है,पर उन मुद्दों के सौ प्रतिशत जमीन पर उतरने की गारंटी हो सकती है याा नहीं? इन सवालों के साथ प्रशांत किशोर चुनावी मैदान में खड़े हैं। अब समझिए प्रशांत किशोर के अस्त्र 5+3 में से पांच को।
1. बेहतर शिक्षा :
प्रशांत किशोर बिहार के पिछड़ने के पीछे यह मानते हैं कि अशिक्षा ही बिहार की गरीबी के पीछे एक बड़ा कारण है।
2. कृषि :
बिहार के विकास में कृषि सेक्टर का बड़ा योगदान हो सकता है। विशेषकर पारंपरिक खेती से थोड़ा हट कर नकदी फसलों का लक्ष्य आधारित खेती कर किसानों की आमदनी और रोजगार का अवसर पैदा करना।
3. पलायन :
राज्य में स्किल्ड लेबर का पलायन भी बिहार की गरीबी का एक बड़ा कारण है। उद्योग का कुशल प्रबंधन इस पलायन का जवाब बन सकता है। हर क्षेत्र की अलग अलग खूबियां है और उस क्षेत्र आधारित उद्योग उस क्षेत्र के पलायन को रोक सकते है।
4. विश्व स्तरीय शिक्षा:
प्रशांत किशोर शिक्षा को बेहतर विकास का साधन मानते है। इस लिए पंचायत से ले कर राजधानी तक बेहतर शिक्षा के मुद्दे के जरिए बिहार के वोटरों का मिजाज भी बदलना चाहते हैं।
5. राइट टू रिकॉल:
प्रशांत किशोर ने राइट टू रिकॉल को भी एक मुद्दा बनाया है। इसमें प्रत्याशी जनहित में कार्य नहीं करे तो राइट टू रिकॉल के जरिए विधायिकी वापस ली जा सकती है। ये अधिकार जनता को मिलेगा।
PK को ताजा मुद्दों पर भी भरोसा
इन मुद्दों के अलावा प्रशांत किशोर चुनावी जंग में तात्कालिक मुद्दे के साथ भी चुनाव में जाना चाहते हैं। ये वे मुद्दे हैं जो वर्तमान में राज्य की जनता के परेशानी के कारण बने हैं ,मसलन
1. शराब बंदी :प्रशांत किशोर शराब बंदी के विरुद्ध खड़े हैं। उनका यह वादा भी है कि उनकी सरकार बनी तो सबसे पहले शराब बंदी कानून खत्म कर दिया जाएगा। साथ ही शराब के रोजगार से राज्य सरकार को जो मुनाफा होगा उसी से बेहतर शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी।
2. भूमि सर्वे :राज्य सरकार ने भूमि सर्वे को ले कर जो घोषणा की है उसके बाद से समाज में तनाव पैदा हो गया है। यह सर्वे कम ब्लॉक स्तर पर लूट का साधन ज्यादा बन गया है।
3. स्मार्ट मीटर :स्मार्ट मीटर को ले कर भी समाज में तनाव व्याप्त है। हर स्तर पर शिकायत हो रही है। प्रशांत इस मुद्दे से भी बिहार की जनता को राहत दिलाने का वादा कर रहे है।








