
शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह जानकारी पार्टी के उप प्रधान डॉक्टर दलजीत सिंह चीमा ने दी है। सुखबीर बादल को श्री अकाल तख्त साहिब से तनखाहिया घोषित किया गया है जिसके बारे में धार्मिक सजा सुनाई जानी बाकी है। इस सजा के बीच उन्होंने पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है।
चुनावों में शिअद की हालत पतली
गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं ने इस नाराजगी को शीर्ष पर पहुंचा दिया और 2017 के विधानसभा चुनाव में हालत यह हो गई कि पार्टी 59 सीटों से कम होकर मात्र 15 सीटों पर सिमट गई। 2022 में तो स्थिति इससे भी पतली हो गई। इस दौरान पूर्व विधायक इकबाल सिंह झूंदा की अगुवाई में एक कमेटी बनाकर इस हार के कारणों और पार्टी को फिर से खड़ा करने संबंधी रिपोर्ट देने को भी कहा गया। झूंदा कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी, जिसमें उन्होंने हार के न केवल कारणों का जिक्र किया बल्कि सभी नेताओं को अपने पद छोड़ने की भी सिफारिश की।
सुखबीर बादल ने स्वीकारी गलती
पार्टी प्रधान ने सभी विंग को भंग कर दिया, लेकिन यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। कमेटी की रिपोर्ट में सुखबीर बादल अप्रत्यक्ष ढंग से इस्तीफे के लिए कहा गया था। उन पर इस्तीफे का दबाव लगातार बढ़ रहा था। इस दबाव के कारण ही पार्टी दोफाड़ हो गई।
सुखदेव सिंह ढींडसा जैसे नेता, जो अकाली दल में फिर से शामिल हो गए थे, वापिस आ गए लेकिन संसदीय चुनाव के बाद उनके सहित कई सीनियर नेताओं जिनमें परमिंदर सिंह ढींडसा, प्रो प्रेम सिंह चंदूमाजरा, बीबी जगीर कौर, गुरप्रताप सिंह वडाला जैसे नेता अलग हो गए।








