
अन्ना विश्वविद्यालय के परिसर में छात्रा के साथ हुए यौन उत्पीड़न की जांच के लिए मद्रास हाई कोर्ट ने शनिवार को विशेष जांच दल (एसआइटी) के गठन का निर्देश दिया। साथ ही अदालत ने तमिलनाडु के डीजीपी को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि भविष्य में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराध के मामलों में एफआइआर लीक न हो।
अन्ना विश्वविद्यालय के परिसर में छात्रा के साथ हुए यौन उत्पीड़न की जांच के लिए मद्रास हाई कोर्ट ने शनिवार को विशेष जांच दल (एसआइटी) के गठन का निर्देश दिया। एसआइटी की तीनों सदस्य महिला आइपीएस अधिकारी होंगी। अदालत ने पीड़िता की पहचान उजागर करने और प्राथमिकी को लीक करने के लिए चेन्नई पुलिस की खिंचाई की और राज्य सरकार को पीड़िता को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया।अदालत ने तमिलनाडु के डीजीपी को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि भविष्य में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराध के मामलों में एफआइआर लीक न हो। जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायण की पीठ ने मामले की जांच सीबीआइ को सौंपने की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
पीठ कहा कि पीड़िता की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए
पीठ कहा कि पीड़िता की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। अन्ना विश्वविद्यालय को उससे कोई फीस नहीं लेनी चाहिए। इस बीच तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि शनिवार को अन्ना विश्वविद्यालय पहुंचे और यौन उत्पीड़न की घटना के बारे में जानकारी ली।
गौरतलब है कि अन्ना विश्वविद्यालय की इंजीनियरिंग छात्रा के साथ 23 दिसंबर को कैंपस के अंदर दो लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। पुलिस ने इस सिलसिले में ज्ञानशेखरन को गिरफ्तार कर लिया है। दूसरे अभियुक्त की तलाश जारी है।
तथ्यों का पता लगाने के लिए एनसीडब्ल्यू ने बनाई कमेटी
राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने छात्रा से दुष्कर्म मामले में तथ्यों का पता लगाने के लिए शनिवार को कमेटी का गठन किया। कमेटी के सदस्य 30 दिसंबर को चेन्नई का दौरा कर सकते हैं। बयान में कहा गया है कि एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष विजया रहटकर ने जांच करने और कार्रवाई की सिफारिश के लिए कमेटी का गठन किया है। कमेटी में एनसीडब्ल्यू सदस्य ममता कुमारी और सेवानिवृत्त आइपीएस अधिकारी और महाराष्ट्र के पूर्व डीजीपी प्रवीण दीक्षित शामिल हैं।
Author: Red Max Media
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