
अब समुद्र में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होने जा रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि रक्षा मंत्रालय ने नौसेना की पनडुब्बियों की क्षमता बढ़ाने के लिए लगभग 2867 करोड़ रुपये के दो समझौतों पर सोमवार को हस्ताक्षर किए। पहले समझौते के तहत डीआरडीओ-एआईपी के लिए एयर इंडीपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) प्लग का निर्माण कर उन्हें भारतीय पनडुब्बियों पर लगाया जाएगा। इनका निर्माण स्वदेशी तकनीक से होगा।
रक्षा मंत्रालय ने नौसेना की पनडुब्बियों की क्षमता बढ़ाने के लिए लगभग 2,867 करोड़ रुपये के दो समझौतों पर सोमवार को हस्ताक्षर किए। इन समझौतों से पारंपरिक पनडुब्बियों की पानी के नीचे रहने की अवधि बढ़ाने की क्षमता विकसित की जाएगी और कलवारी श्रेणी की पनडुब्बियों पर इलेक्ट्रानिक हेवी वेट तारपीडो (ईएचडब्ल्यूटी) लगाए जाएंगे जिससे उनकी मारक क्षमता में वृद्धि होगी।
रक्षा मंत्रालय ने जारी किया बयान
रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, 1,990 करोड़ रुपये का पहला समझौता मुंबई स्थित मझगांव डाक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के साथ किया गया है, जबकि 877 करोड़ रुपये का दूसरा समझौता फ्रांस के नेवल ग्रुप के साथ किया गया है।
दोनों समझौतों पर रक्षा सचिव राजेश कुमार की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। पहले समझौते के तहत डीआरडीओ-एआईपी के लिए एयर इंडीपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) प्लग का निर्माण कर उन्हें भारतीय पनडुब्बियों पर लगाया जाएगा।
स्वदेशी तकनीक से किया जा रहा विकसित
एआईपी तकनीक को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा देश में ही विकसित किया जा रहा है। बयान के अनुसार, इस परियोजना से लगभग तीन लाख व्यक्ति-दिवस के रोजगार सृजित होंगे। दूसरे समझौते के तहत भारतीय नौसेना, डीआरडीओ एवं फ्रांस का नेवल ग्रुप मिलकर काम करेंगे और कलवरी श्रेणी की पनडुब्बियों पर इलेक्ट्रानिक हेवी वेट तारपीडो लगाए जाएंगे। इनके लगने से इस श्रेणी की पनडुब्बियों की मारक क्षमताओं में काफी वृद्धि हो जाएगी।








