बिहार में क्यों आती है बाढ़? प्रशांत किशोर ने बताई वजह

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प्रशांत किशोर
जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर ने बिहार में आई बाढ़ पर अपनी राय रखी है। पीके ने बताया कि बिहार में बाढ़ एक बड़ी समस्या क्यों है और इसका समाधान क्या हो सकता है। उन्होंने बताया कि कैसे बिहार के अलग-अलग हिस्सों में बाढ़, जलजमाव और सूखे जैसी समस्याएं हैं। पीके ने अपने आने वाले विजन डॉक्यूमेंट के बारे में भी बताया जिसमें इन सभी समस्याओं का समाधान होगा।

बिहार इस समय बाढ़ की चपेट में है। राज्य के 16 जिलों में बाढ़ का कहर देखने को मिल रहा है। बिहार में हर साल बाढ़ क्यों आती है? इस सवाल का जवाब जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने दिया है। प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में उचित जल प्रबंधन की योजना नहीं है। इस वजह से ही आधा बिहार बाढ़ की चपेट में आता है। इसके अलावा जल जमाव और सूखे की भी समस्या है। पीके ने कहा कि बिहार की लगभग 50 फीसदी जमीन ऐसी है, जहां बाढ़ का जोखिम है, जबकि 30 प्रतिशत जमीन पर स्थायी जल जमाव की स्थिति है। 25 से 27 फीसदी जमीन सूखे की चपेट में है।

उन्होंने विस्तार से बताया कि अगर पूरे बिहार को क्षेत्रवार देखा जाए, तो उत्तर बिहार के तराई वाले क्षेत्रों जैसे पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, दरभंगा, सुपौल, अररिया, किशनगंज में बाढ़ और नदियों के कटाव की समस्याएं प्रमुख हैं। वहीं, गोपालगंज, सिवान, छपरा, वैशाली, समस्तीपुर, खगड़िया और बेगूसराय जैसे जिलों में बाढ़ की तुलना में जल जमाव की समस्या अधिक गंभीर है।

जल प्रबंधन से संबंधित समग्र योजना पेश की जाएगी

प्रशांत किशोर ने कहा कि हर पंचायत और प्रखंड में हजारों एकड़ जमीन ऐसी है, जहां स्थायी रूप से पानी भरा रहता है। वहीं, गंगा के दक्षिण क्षेत्र यानी दक्षिण बिहार में सूखे की समस्या बनी हुई है। वहां पानी पहुंच ही नहीं रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब जन सुराज का विजन डॉक्यूमेंट जारी किया जाएगा, उसमें बाढ़ के बारे में कोई अलग से योजना नहीं होगी, बल्कि जल प्रबंधन से संबंधित समग्र योजना पेश की जाएगी।

पीके ने आगे कहा कि विजन डॉक्यूमेंट में एक समन्वित जल प्रबंधन योजना होगी, जिसमें बाढ़, जल जमाव और सूखे को एक साथ समाधान किया जाएगा। कोसी प्लान, गंडक प्लान या सोन कनाल जैसी अलग-अलग योजनाओं के बजाय एक इंटीग्रेटेड प्लान होगा, जो तीनों समस्याओं का समग्र समाधान करेगा।

लोगों ने बताया कि ठेकेदार बांधों में खुद छेद करवाते हैं

प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि बाढ़ की समस्या का एक बड़ा हिस्सा इंजीनियरों और अधिकारियों की ओर से अपने निजी लाभ के लिए बढ़ाया जा रहा है। गांवों में लोग बता रहे हैं कि ठेकेदार बांधों में खुद छेद करवाते हैं, ताकि बाढ़ नियंत्रण के नाम पर अधिक धन आवंटित किया जा सके और उसमें भ्रष्टाचार किया जा सके।

बाढ़ को चीन की तरह एक बड़ी ताकत में बदलना है

जन सुराज के नेता पीके ने कहा कि ‘हमें केवल बाढ़ नियंत्रण नहीं करना है, बल्कि इस जल को, जो अभी अभिशाप बना हुआ है, बिहार की एक बड़ी ताकत में बदलना है। चीन ने सैकड़ों साल पहले इसी तरह का समाधान कर दिखाया है। उन्होंने नदियों का ग्रिड बनाकर बाढ़, सूखे और जल जमाव की समस्याओं का हल निकाला।’

Red Max Media
Author: Red Max Media

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