झारखंड के मंत्री की पीएचडी डिग्री की सत्यता की होगी जांच

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झारखंड के जल संसाधन और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन की डिग्री लेते हुए तस्वीर

झारखंड के जल संसाधन और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन कथित तौर पर फर्जी पीएचडी डिग्री पेश करने के आरोप में जांच एजेंसी की जांच के दायरे में आ गए हैं। यह डिग्री उन्होंने संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय संबंधों का इस्तेमाल करके हासिल की थी।

झारखंड के जल संसाधन एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन द्वारा संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जरिए फर्जी पीएचडी डिग्री हासिल करने के आरोपों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कर सकती है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की डीआईजी जया रॉय ने सीबीआई के निदेशक को पत्र लिखकर मामले की जांच करने और आवश्यक कदम उठाने को कहा है।

रॉय ने झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी द्वारा लिखे गए पत्र को भी आगे बढ़ाया है, जिसमें मामले का ब्योरा दिया गया है। मरांडी ने 3 मई को एनआईए को पत्र भेजा था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि हफीजुल हसन के पास मौजूद पीएचडी डिग्री फर्जी है और जिस संस्थान से उन्होंने डिग्री हासिल की है, उसके संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय संबंध हैं। हफीजुल ने ‘आधुनिक समाज में समाज कल्याण एवं राजनीति’ विषय पर किए गए शोध के आधार पर पीएचडी डिग्री हासिल करने का दावा किया है। मंत्री का दावा है कि उन्होंने यह डिग्री भारत वर्चुअल ओपन यूनिवर्सिटी नामक संस्थान से हासिल की है।

हालांकि, मरांडी ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि उक्त संस्थान को न तो यूजीसी से मान्यता प्राप्त है और न ही किसी राज्य सरकार से। साथ ही यह भी दावा किया गया है कि संस्थान के नाम पर एक गिरोह काम करता है, जो अवैध कामों में लिप्त है। मरांडी ने अपने पत्र में कहा है कि संस्थान कॉन्सेप्ट एजुकेशन ट्रस्ट के माध्यम से चलाया जाता है, जिस पर लोगों को विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर गलत काम करने का आरोप है। इसके अलावा, सेंट्रल क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट अफ्रीका से संबद्ध इस संस्थान के तार पाकिस्तान से जुड़े बताए जाते हैं।

यह बात तब सामने आई जब इसके चांसलर को 28 मार्च, 2025 को इस्लामाबाद स्थित एक संस्थान द्वारा डिग्री प्रदान की गई। मरांडी द्वारा एनआईए को दी गई शिकायत में कहा गया है कि भाजपा द्वारा इस मामले को सार्वजनिक किए जाने के बाद मंत्री ने अपने एक्स अकाउंट से मामले से संबंधित सभी तस्वीरें और पोस्ट हटा दिए। इस बीच, विश्वविद्यालय की वेबसाइट 30 अप्रैल, 2025 की सुबह से बंद है।

भाजपा ने देश की सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए गहन जांच की मांग की है, लेकिन हफीजुल हसन ने अभी तक इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

Red Max Media
Author: Red Max Media

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