
दिल्ली सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए फीस बिल 2025 को अध्यादेश के माध्यम से लागू करने का निर्णय लिया है। उल्लंघन करने पर 10 लाख तक का जुर्माना और मान्यता रद्द हो सकती है। प्रत्येक स्कूल में फीस विनियमन समिति बनेगी जिसमें अभिभावक भी शामिल होंगे। फीस वृद्धि 18 मापदंडों पर आधारित होगी। यह फैसला बच्चों और अभिभावकों के हित में लिया गया है।
निजी स्कूलों की मनमानी को रोकने के लिए दिल्ली सरकार ने दिल्ली स्कूल एजुकेशन ट्रांसपेरेंसी इन फिक्सेशन एंड रेगुलेशन ऑफ फीस बिल 2025 को अध्यादेश के माध्यम से लागू करने का निर्णय लिया है।
नियम का उल्लंघन करने पर 10 लाख तक जुर्माना और निरस्त होगी स्कूल की मान्यता निरस्त हो सकती है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इसे मंजूरी दी गई। अब राष्ट्रपति से मंजूरी के लिए इसे उपराज्यपाल के पास भेजा जाएगा।
29 अप्रैल को दिल्ली सरकार की कैबिनेट बैठक में दिल्ली स्कूल एजुकेशन ट्रांसपेरेंसी इन फिक्सेशन एंड रेगुलेशन आफ फीस बिल 2025 को मंजूरी दी गई थी। उसे कानून बनाने के लिए विधानसभा का सत्र बुलाया गया था लेकिन बाद में किसी कारणवश उसे स्थगित कर दिया गया।
इस कारण अब इसे अध्यादेश के माध्यम से लागू करने का निर्णय लिया गया। दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने प्रेसवार्ता में इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा, यह अध्यादेश एक अप्रैल से प्रभावी माना जाएगा। कैबिनेट का यह निर्णय दिल्ली के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और उनके माता-पिता के हित में है।
अब उनका आर्थिक शोषण नहीं हो सकेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प ‘सबका साथ सबका विकास’ और लोगों के जीवन को आसान, पारदर्शी और गरिमामय बनाने की सोच से प्रेरणा लेते हुए दिल्ली सरकार ने यह ऐतिहासिक फैसला लिया है। इससे 1677 निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगेगी।
प्रमुख प्रविधानः
- प्रत्येक स्कूल एक स्कूल स्तरीय फीस विनियमन समिति का गठन करेगा। इस समिति में स्कूल प्रबंधन के अध्यक्ष, सदस्य सचिव के रूप में प्रधानाचार्य, तीन शिक्षक, पांच अभिभावक शामिल होंगे। जिनमें अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदाय के सदस्य और कम से कम दो महिलाएं रखा जाना अनिवार्य होगा। शिक्षा निदेशालय की ओर से नामित व्यक्ति पर्यवेक्षक के रूप में काम करेगा। समिति की मंजूरी के बाद तीन वर्ष के लिए फीस वृद्धि हो सकेगी।
- फीस बढ़ाने का निर्णय 18 महत्वपूर्ण मापदंडों पर आधारित होगा, जिनमें स्कूल भवन और कक्षा की स्थिति, स्कूल की वित्तीय स्थिति और विज्ञान प्रयोगशाला, पुस्तकाल और खेल के मैदान की गुणवत्ता शामिल है। स्कूल स्तरीय समितियां 31 जुलाई तक गठित कर दी जाएंगी और उन्हें 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। यदि समिति के निर्णय से 15 प्रतिशत अभिभावक सहमत नहीं होंगे तो वह जिला स्तरीय समिति में अपील कर सकते हैं।
- यदि स्कूल स्तरीय समिति समय पर अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करने में विफल रहती है तो मामला जिला स्तरीय समिति के समक्ष भेजा जाएगा। यदि फिर भी समाधान नहीं होता है तो सात सदस्यों वाली राज्य स्तरीय समिति को अंतिम निर्णय लेने का अधिकार दिया जाएगा।








