भीड़ नियंत्रण कानून ला रही कर्नाटक सरकार

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3 साल की सजा, 5 लाख का जुर्माना
चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर मची भगदड़ में बीते दिनों 11 लोगों की मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद अब कर्नाटक सरकार क्राउड कंट्रोल कानून लाने जा रही है।

बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हुई भगदड़ में बीते दिनों 11 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद भीड़ प्रबंधन प्रोटोकॉल को और सख्त बनाने के उद्देश्य से कर्नाटक सरकार एक नया कानून लाने जा रही है। कानून के इस मसौदे पर राज्य मंत्रिमंडल में चर्चा की गई और उम्मीद है कि इसे कर्नाटक विधानसभा के मॉनसून सत्र में पेश किया जाएगा। चलिए बताते हैं कि नए कानून में क्या है?

इवेंट आयोजकों के लिए सख्त दंड का प्रावधान

प्रस्तावित कानून में सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण मानदंडों का पालन न करने वाले इवेंट आयोजकों के लिए आपराधिक दंडों को अनिवार्य किया गया है। मसौदे के अनुसार, जो आयोजक पुलिस से पूर्व अनुमति नहीं लेंगे, भीड़ को नियंत्रित करने में विफल रहेंगे, किसी घटना की स्थिति में मुआवजा देने में लापरवाही बरतेंगे या अधिनियम के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन करेंगे, उन्हें सख्त कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ेगा। ये अपराध गैर-संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे। विधेयक के मुख्य प्रावधानों में शामिल हैं:

  1. 3 साल तक की कैद
  2. 50,000 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना

जवाबदेही और मुआवजा अनिवार्य

बिल में सार्वजनिक आयोजनों के आयोजकों, खास तौर पर खेल, मैच या सर्कस जैसे व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए आयोजित किए जाने वाले आयोजनों के लिए विस्तृत जिम्मेदारियों का भी उल्लेख किया गया है। बिल के मुताबिक अपराधों में शामिल हैं-

  • भीड़ सुरक्षा मानदंडों की जानबूझकर अवज्ञा करना
  • कुप्रबंधन के कारण चोट या मौत का कारण बनना
  • ऐसी गड़बड़ी पैदा करना जिससे घबराहट, चोट या भगदड़ मच जाए
  • खतरनाक परिणामों को बढ़ावा देना या लापरवाही करना
  • इस बिल में सबसे अहम बात ये है कि नए कानून में यह अनिवार्य किया गया है कि आयोजक भगदड़ जैसी घटनाओं के पीड़ितों को मुआवजा देंगे। अगर मुआवज़ा नहीं दिया जाता है, तो सरकार को भूमि राजस्व बकाया के रूप में राशि वसूलने का अधिकार है, जिसमें आयोजनकर्ता की संपत्ति को नीलाम करने का विकल्प भी शामिल है।

धार्मिक समारोहों के लिए छूट

धार्मिक आयोजनों को प्रस्तावित कानून में छूट दी गई है। यह छूट इन आयोजनों के सांस्कृतिक और अनुष्ठानिक महत्व को मान्यता देती है। इनमें पारंपरिक सामुदायिक समारोह शामिल हैं, जैसे:

  • जात्रा
  • रथोत्सव
  • पल्लक्की उत्सव
  • तेप्पदा तेरु
  • उरुस

आलोचना के बीच सरकार लाई प्रस्ताव

यह विधेयक सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की तीखी आलोचना के बीच आया है, जिसमें विपक्षी दलों भाजपा और जेडी(एस) ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार दोनों को 4 जून के जश्न के दौरान योजना की कमी और खराब क्रियान्वयन के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। बता दें भगदड़ उस समय हुई जब रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के पहले आईपीएल खिताब का जश्न मनाने के लिए हजारों लोग चिन्नास्वामी स्टेडियम में इकट्ठा हुए थे। इसी दौरान स्टेडियम के बाहर भगदड़ मचने की वजह से 11 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हो गए।

Red Max Media
Author: Red Max Media

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